सम्यक बौद्ध महासभा दल्ली राजहरा के तत्वाधान में अंबेडकर मेमोरियल हाल में भारत देश की प्रथम शिक्षित महिला एवं अध्यापिका सावित्रीबाई फुले का 189 वाँ जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
दल्लीराजहरा :- भारत देश की प्रथम शिक्षित महिला एवं अध्यापिका क्रांति ज्योति ,ज्ञान ज्योति मातोश्री सावित्रीबाई फुले का 189 वाँ जयंती समारोह 3 जनवरी 2022 दिन सोमवार को सम्यक बौद्ध महासभा दल्ली राजहरा के तत्वाधान में अंबेडकर मेमोरियल हाल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जब भारत में रहने वाली जनता नाना प्रकार के दुखों समाजिक घृणा से हाहाकार कर रही थी, हर तरफ दमन और अत्याचार हो रहे थे।
जनता लाचार और बेबस होकर दुखी जीवन जीने को मजबूर थी। जीवन को सेवा करने तक सीमित कर दिया गया था ।अंधश्रद्धा और अंधविश्वास के कारण जनता भयभीत थी ।हिंसा और असमानता व्याप्त था ।सही राह दिखाने वाला कोई नहीं था। ऐसे समय में सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के लिए संघर्ष किया। शिक्षा समाज का मार्ग दाता है जो समाज और देश के लोगों को दया ,प्रेम, करुणा ,मातृ बंधुत्व का मार्ग पर चलकर मनुष्य दुखों से मुक्त होकर सुखी संपन्न हो सकता है ।ऐसे विचारवान प्रथम अध्यापिका मातोश्री सावित्रीबाई फुले थी ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिबू नायर अध्यक्ष नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा, विशिष्ट अतिथि के रूप में हेमंत कान्ड़े, बी .एल. बौद्ध ,भरत रँगारी,विशेष अतिथि के रुप में श्रीमती नीता कमल रामटेके चंद्रशिला बाम्बेश्वर,जोत्सना मेश्राम अध्यक्षता -अशोक बाम्बेश्वर अध्यक्ष सम्यक बौद्ध महासभा एवं चंद्ररेखा नंदेश्वर अध्यक्ष महिला मंडल ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शीबू नायर ने अपने उधबोधन कहा कि सामाजिक घृणा ने देश के शूद्र अति शूद्रो के जीवन को मात्र सेवा करने तक ही सीमित कर दिया था। सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के लिए संघर्ष किया और ऐसा कार्य कर दिखाया जो भारत के इतिहास में अभी तक नामुमकिन था।इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष अशोक बाम्बेश्वर द्वारा भवन निर्माण संबंधी मांग पत्र नगर पालिका के अध्यक्ष शीबू नायर को सौंपा गया जिसे नगर पालिक अध्यक्ष द्वारा तत्काल पूरा करने का आश्वासन समाज को दिया गया है ।
तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री शीबू नायर जी को प्रतीक चिन्ह व शाल भेंट कर समाज के लोगों ने सम्मानित किया । सेवानिवृत्त शिक्षक हेमंत कान्ड़े,सत्य विजय बाम्बेश्वर,बी.आर.भोसले, श्रीमती कृष्णा गजभिये,महामाया सोमकुवर,को भी प्रतीक चिन्ह वह शाल से सम्मानित किया गया ।इसी तारत्यमय में महिला सशक्तिकरण के पदाधिकारि नीता कमल रामटेके,चंद्रशिला बाम्बेश्वर, जोत्सना मेश्राम को भी प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का मंच संचालक प्रियन्का बौद्ध एवं आभार प्रकट बी.एल.बौद्ध ने किया।
इस अवसर पर गोरेलाल बाम्बेश्वर , राधेलाल मेश्राम, रोशन पाटिल,किशोर बाम्बेश्वर, हेमंत कुमार रामटेके,दीपक दामले, देवानंद दहिविले,,रतन जामुनकर,सत्यनारायण राम टेके,प्रल्हाद मेश्राम , अजय बन्सोडे, बी.आर.मानवकर,संतोष मेश्राम,रमेश भगत,उत्तम कुमार वाघमारे, हरिश्चंद्र चन्द्रिकपुरे,जितेंद्र मेश्राम,विशाल दशोड़े, अजय रामटेके,रामेश्वर बरसागड़े,बिना बोरकर,उमा रंगारी, मीरा बौद्ध,भूनेश्वरी बाम्बेश्वर,कनक राम टेके ,अनिला बाई मेश्राम,नीतू रामटेके, रितु बाम्बेश्वर,
लता बोरकर,सावित्री रामटेके,
शारदा बाम्बेश्वर,राजकुमारी मेश्राम ,भावना दाशोडे, नमृता रामटेके,साक्षी रामटेके ,संध्या रामटेके एवं काफी संख्या में बौद्ध उपासक एवं उपासिकाये उपस्थिति थे।
CNI News दल्ली राजहरा से प्रदीप सहारे

















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