नदी नालों के पानी से प्यास बुझाते बैगा आदिवासी
बिरसा/बालाघाट।बिरसा जनपद अंतर्गत मछुरदा ग्राम पंचायत के ग्राम नवाटोला के बैगा आदिवासियों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है जिससे इन्हें विभिन्न प्रकार की बीमारियों ने घेर रखा है।कहने को तो पीएचई विभाग हर गांव में स्वच्छ पानी देने का दम्भ भरता है लेकिन सच्चाई जानकर पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।15 घरों की बैगा बस्ती पिछले दो महीने से नदी नालों के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं जिस पानी से जानवर अपनी प्यास बुझाते है उसी पानी से बैगा परिवार अपनी प्यास बुझा रहा है।यह कोई काल्पनिक या 18वी शताब्दी की कहानी नही है।जिसको झूठलाया नही जा सकता।
शासन भले ही बैगाओं के विकास के लिए करोड़ो रूपये फूंक रही है लेकिन प्रशासन में बैठे अधिकारी इस पर कालिख लगाने में कोई कसर नही कर रहे हैं।शासन ने हर गांव में नलजल योजना को शुरू किया है लेकिन हर जगह यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार पीएचई विभाग का कर्मचारी ही ठेकेदार बनकर नलजल योजना का क्रियान्वयन कर रहा है जो अपनी धौस दिखा कर मलाई खा रहा है।बैगाओं के हित में बने सारे नियम कानून ठेंगा दिखा रहे हैं।बैगाओं के लिए योजनाओं की कमी नही है लेकिन इनके तक पहुंचते पहुँचते सारी योजनाओं पर भ्रष्टाचार का ग्रहण लग जाता है।यही कारण है कि आज बैगाओं की मृत्यु दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है।ऐसे में शासन और प्रशासन के ऊपर सवालिया निशान लगना लाजिमी है।जहां पीने के लिए पानी नही मिलता वहां पर बड़ी बड़ी ढींगे मारना शासन प्रशासन को शोभा नही देता।नवाटोला के निवासी बिशरू बैगा, बिरजू,बुतांगी, पंछी,एतवारीन बाई ने बताया कि लगभग दो महीने से हैंडपम्प बिगड़ा हुआ है लेकिन इसको सुधारने वाला कोई नही है जिसकी जानकारी भी दी गई थी लेकिन आज तक कोई भी कर्मचारी देखने तक नही आया।प्यास बुझाने के लिए बैगा परिवारों ने नदी नालों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।बहरहाल इस गांव की यह हालात देखकर ऐसा नही लगता है कि हम 21वी सदी में जी रहे है।यह तस्वीर देखकर शासन प्रशासन के ऊपर सवालिया निशान लगना लाजिमी है।वही इस मामले में ई ई बालाघाट ने हैंडपंप को शीघ्र सुधारने का आश्वासन दिया है।

















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