नाबालिग बेटे ने पिता के खाते से निकाले 1.70 लाख रुपये
(ऑनलाइन गेम खेलने की लत ने 10 वर्ष के नाबालिग ने पिता के खाते से उड़ाए लाखो रुपया)
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट।मोबाइल के बिना आज युवा वर्ग जी नही सकता।नौजवान, बच्चे वृद्ध सभी आज मोबाइल के दीवाने है और हो भी क्यों न आज जमाना है सोशल मीडिया का जिससे जहां चाहो वही रहकर पैसा भेजने,चैटिंग करने,ऑनलाइन शॉपिंग करने,मूवीज देखना,बिल भरना और न जाने कितनी सुविधाओं से लैस है ये मोबाइल।लेकिन कभी कभी यही सुविधा असुविधा में बदलकर लोगो के लिए मुसीबत बन जाती है।खासकर बच्चों के मामले में जब बच्चे गेम खेलते खेलते इसमें इतना ज्यादा उलझ जाते हैं कि पढ़ाई से लेकर खाने पीने तक का ध्यान नही रहता।मोबाइल को लेकर ऐसा ही एक मामला सामने आया है। बालाघाट शहर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो उन माता-पिता के लिए सबक है, जो बच्चे को मनोरंजन के लिए मोबाइल तो दे देते हैं, लेकिन वो मोबाइल पर गेम के नाम पर क्या कर रहे हैं, इसकी परवाह नहीं करते।
शहर के वार्ड नंबर 24, सुरभि नगर निवासी किशोर कुमार के महज दस साल के बेटे को ऑनलाइन गेम फ्री फायर की ऐसी लत लगी कि उसने इस गेम में फायर उपकरण और आईडी खरीदने के लिए अपने ही पिता के बैंक अकाउंट से 1.70 लाख रुपए गायब कर दिए। बेटा, पिछले दो साल से पिता के खाते से पैसे गायब करता रहा, जिसकी भनक पिता को नहीं लगी। मंगलवार को कोतवाली स्थित नोडल साइबर शाखा में इसकी शिकायत की गई तो जांच में सामने आया कि फरियादी के बैंक खाते से पैसे गायब करने वाला कोई दूसरा नही बल्कि उसी का इकलौता बेटा है।
*यूट्यूब से सीख कर उड़ाए रुपये*
10 साल के बेटे ने बैंक अकाउंट से पैसे भेजने या यूपीआई पिन बनाने की तरकीब यूट्यूब से सीखी है। पुलिस को दिए बयान में बच्चे ने बताया कि उसने यूट्यूब में अपलोडेड वीडियो देखकर यूपीआई पिन जनरेट करना सीखा था। इस खुलासे के बाद उसके माता-पिता के साथ पुलिस भी हैरत में है। बताया गया कि पिता ऑनलाइन पेमेंट या ट्रांजेक्शन के लिए जिस मोबाइल का इस्तेमाल करते थे, उसी मोबाइल में बालक फ्री फायर गेम खेलता था।
बच्चे ने शातिर अंदाज में बैंक खाते से 1.70 लाख की राशि सिर्फ ऑनलाइन गेम के लिए निकाली है, ये घटना पालकों को सतर्क करने वाली है, जिससे सबक लेकर पालक अपने बच्चों को मोबाइल देते वक्त सतर्क रहें तथा मोबाइल में वह क्या कर रहे हैं, उन पर जरूर नजर रखें।मामला दर्ज न होने के कारण बालक को थाने में पुलिस व परिजनों ने समझाइश देकर छोड़ दिया और दोबारा ऐसा न करने की हिदायत भी दिया।बहरहाल मोबाइल सुविधा के लिए बना है जिससे थोड़ी सी सतर्कता बरत कर असुविधा से बचा जा सकता है।
- केएस गहलोत, प्रभारी, कोतवाली।

















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