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Monday, February 21, 2022

राजहरा खदान समूह में (अन आर्म्ड गार्ड्स) के ठेके में कार्यरत कर्मियों के द्वारा संघ को यह लिखित शिकायत मिली कि ठेकेदार द्वारा उन्हें केन्द्र सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन के जगह राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है जिसका संघ पुरजोर विरोध करता है।

 राजहरा खदान समूह में (अन आर्म्ड गार्ड्स) के ठेके में कार्यरत कर्मियों के द्वारा संघ को यह लिखित शिकायत मिली कि ठेकेदार द्वारा उन्हें केन्द्र सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन के जगह राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है जिसका संघ पुरजोर विरोध करता है।




दल्लीराजहरा :-  राजहरा खदान समूह में वाच एंड वार्ड (अन आर्म्ड गार्ड्स) के ठेके में कार्यरत कर्मियों के द्वारा संघ को यह लिखित शिकायत मिली कि जब से यह ठेका संचालित हो रहा है तब से लेकर आजतक ठेकेदार द्वारा उन्हें केन्द्र सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन के जगह राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है जबकि वे खदान में कार्यरत हैं। अतः उन्हें केंद्र सरकार के द्वारा तय किये गए न्यूनतम वेतन दिलवाया जावे। 


कर्मियों की शिकायत प्राप्त होने के बाद संघ ने मामले का अध्ययन किया और पाया कि वर्तमान प्रकरण में ठेकेदारों की नहीं बल्कि बीएसपी प्रबंधन की ही गलती है और बीएसपी प्रबंधन द्वारा गलत निविदा बनाई जाती रही है जिसके वजह से इस ठेके में कार्यरत कर्मियों का लगातार शोषण हो रहा है। इस मुद्दे पर जब संघ ने स्थानीय अधिकारीयों से चर्चा की तो उन्होंने मामले से अपने आपको अलग करते हुए कहा कि चूँकि उक्त ठेका भिलाई से संचालित होता है अतः वे इस बाबत कुछ नहीं कह और कर सकते हैं। तब संघ ने प्रबंधन के कई अधिकारीयों से चर्चा की लेकिन अंततः समस्या का समाधान नहीं होने पर संघ ने औद्योगिक विवाद के तहत उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर के समक्ष मामले को दयार किया जिसपर दिनांक 18.02.2022 को सुनवाई हुई।


इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए संघ के उपमहासचिव लखनलाल चौधरी ने बताया कि सुनवाई के दौरान प्रबंधन की तरफ से पक्ष रखते हुए महाप्रबंधक कार्मिक (खदान मुख्यालय) श्री सूरज कुमार सोनी ने कहा कि चूँकि सुरक्षा कर्मी खदान के बाहर कार्य करते हैं अतः वे माइंस एक्ट में परिभासित खदान के दायरे में नहीं आते हैं और ऐसे में उन्हें खदान श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा सकता है और चूँकि उक्त ठेका भिलाई से संचालित होता है अतः इन श्रमिकों पर राज्य सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन लागू किया जा रहा है जो कि प्रबंधन के नजर में कानूनी तौर पर सही है।


प्रबंधन के इस तर्क का विरोध करते हुए संघ के प्रतिनिधि, एम.पी.सिंह, अध्यक्ष (केंद्रीय) खदान मजदूर संघ भिलाई, ने कहा कि प्रबंधन का उक्त तर्क पूर्णतः गलत है। चूँकि वाच एंड वार्ड (अन आर्म्ड गार्ड) के कार्य को केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित कार्य की श्रेणी में रखा गया है और भिलाई इस्पात संयंत्र एक केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम होने के नाते केंद्र सरकार के अधीनस्थ कार्यरत है अतः प्रबंधन का तर्क अव्यवहारिक एवं अवैधानिक है। जहांतक भिलाई इस्पात संयंत्र की बात है तो सम्पूर्ण भिलाई इस्पात संयंत्र सेल की एक इकाई है और सेल एक केंद्रीय सार्वजानिक उपक्रम है अतएव कानूनी तौर पर सेल अथवा उसके किसी भी इकाई के लिए समुचित सरकार केंद्र सरकार ही है और ऐसे में वाच एंड वार्ड कार्य में लगे श्रमिकों को केंद्र सरकार के द्वारा तय किये गए न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए। 


दोनों पक्ष की बात सुनने के उपरान्त उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर ने संघ के प्रतिनिधि को अगले सुनवाई के तारीख पर आवेदक कर्मियों का क्लेम फॉर्म लाने हेतु कहते हुए अगले सुनवाई की तारीख दिनांक 02.03.2022 को तय की। संघ को इस बात का पूर्ण भरोसा है कि उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर द्वारा कर्मियों के पक्ष में फैसला आवेगा और उन्हें केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन रूपए 617/- प्रतिदिन + 88.46  (AWA) के रूप में मिलना शुरू होगा जो कि उनका वैधानिक हक़ है। वर्तमान में कानून की गलत व्याख्या करते हुए गलत निविदा बनाकर बीएसपी प्रबंधन द्वारा प्रत्येक कर्मियों का प्रतिदिन रुपये 240/- का नुकसान किया जा रहा है जिसका संघ पुरजोर विरोध करता है।






CNI न्यूज़ दल्ली राजहरा से प्रदीप सहारे

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