डीकेपी-हिंदी मीडियम स्कूल आत्मानंद-इंग्लिश-मीडियम में बदलने से विरोध-शुरू मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम-कोटा को सौपा ज्ञापन।
गरीब-मध्यम-वर्ग तबके के लोगो को बेहतर शिक्षा के लिए स्व:डाया-भाई खुशाल भाई पटेल ने शासन-प्रशासन को दान में दी थी जमीन।
कोटा....गरीब-मध्यम-वर्ग तबके सहित उन सभी वर्गों को बेहतर-शिक्षा का प्रकाश मिले भारत के आजादी के दो वर्ष पूर्व 1945-से मिडिल-स्कूल के रूप में संचालित कोटा-नगर का डीकेपी-हायर-सेकंडरी-हाईस्कूल हिंदी माध्यम जो कि 1954 में अस्तित्व में आया..07-एकड़ में फैला डीकेपी-स्कूल की जमीन को दान-स्वरूप देने वाले कोटा-नगर के गुजराती परिवार के ही स्व:डाया भाई खुशाल-भाई पटेल के नाम का स्कूल का वर्तमान में जिला-प्रशासन के द्वारा खनिज-मद के लगभग 50-लाख से ऊपर की राशि से लोक-निर्माण-विभाग के द्वारा पूरे स्कूल का रंगरोगन-किया जा रहा है..
खप्पर की जगह खप्पर की तरह दिखने वाला टिन..भवन निर्माण..नए फर्नीचर..नए क्लास रूम..नए दरवाजे-खिड़की से डीकेपी स्कूल का पूरा कायाकल्प किया गया है सरकारी-फरमान के बाद 75-साल पुराने स्कूल डीकेपी स्कूल का नाम बदलकर स्वामी-आत्मानंद इंग्लिश-मीडियम में बदला जा रहा है.जिसके विरोध में आज कोटा-नगर के जनप्रतिनिधियों सहित डीकेपी स्कूल में पढ़ चुके पूर्व-छात्रों ने विरोध जताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम-कोटा को एक ज्ञापन सौपा।
हिंदी है--हम वतन है--हिंदुस्तान हमारा हिंदी हमारी मातृभाषा है.. पर वर्तमान में पूरे भारतवर्ष में हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी-भाषा की घुसपैठ बढ़ चुकी है..अंग्रेजी-भाषा वर्तमान-स्थिति में जरूरत के बजाए कमजोरी बनते जा रही है..शिक्षा पर अधिकार सभी तबकों का है जिस प्रकार से बिजली-पानी सड़क-स्वास्थ बुनियादी सुविधाओं के दायरे में आता है..वैसे ही बेहतर शिक्षा से बेहतर समाज बेहतर प्रदेश सहित देश की संरचना होती है..सरकारें 05-वर्ष में आते-जाते रहती है..परंतु शिक्षा का मंदिर-सालो से अपनी जगह पर ज्यो-का-त्यों अडिग है..
बेहतर होता कि वर्तमान सरकार के मुखिया व उनके मातहत सलाहकार स्वामी-आत्मानंद के नाम से एक अलग से मद बनाकर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के जीर्ण-शीर्ण शासकीय-स्कूलों का जीर्णोद्धार-करते सबको समान रूप से शिक्षा का अधिकार मिले इसकी व्यवस्था बनाते बजाए यूपी-सरकार की तर्ज पर नाम बदलने की परंपरा को अपनाते हुए..प्रदेश के मुखिया सहित शिक्षा-विभाग के मातहतों को चाहिए कि बिना नाम परिवर्तन शासकीय-स्कूलों को बेहतर कैसे किया जाए पड़ोसी राज्य दिल्ली में बने शासकीय स्कूलों का निरीक्षण के लिए भेज देते दिल्ली-भारत मे ही है।
ज्ञापन-सौंपने के दौरान कोटा नगर के जनप्रतिनिधियों सहित डीकेपी के पूर्व छात्रों ने एसडीएम-कोटा टीआर भारद्वाज को अपनी भावनाओं से अवगत कराते हुए निवेदन किया कि आत्मानंद-इंग्लिश मीडियम से उन्हें कोई आपत्ति नही..परंतु डीकेपी हिंदी माध्यम स्कूल को बंद नही किए जाने के साथ-साथ स्कूल का नाम परिवर्तन न किया जाए..स्कूल में पढ़ने वाले 800-छात्र-छात्राओं के भविष्य का हवाला दिया गया जिसके बाद एसडीएम-कोटा के द्वारा ज्ञापन सौंपने वाले जनप्रतिनिधियों सहित पूर्व छात्रों की भावनाओं को अपने उच्च-अधिकारियों को अवगत कराने की बात कही गई।

















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