26 मार्च को विश्व शांति की कामना हेतु अंबाह जैन मंदिरो में आदिनाथ ऋषभ देव का जन्म तप कल्याणक के दिन हुई शांति धारा।
अंबाह। 26 मार्च को महावीर जिनालय चुंगी नाका पर सुबह 7 बजे भगवान ऋषभ देव का महामस्तकाबिषेक और शांति धारा विश्व शांति की कामना हेतु जन्म तप कल्याणक के दिन की गई।जिसमे सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहें। शाम को आरती और विमल शास्त्री के द्वारा प्रवचन किए जाएंगे। सौरभ जैन वरेह बालो ने बताया कि जैन दर्शन के प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव श्री ऋषभदेव भगवान शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में राजा नाभिराय व माता मरुदेवी के आंगन में जन्म लेकर भगवान ऋषभदेव ने प्राणीमात्र का कल्याण किया| भारतवर्ष के स्वर्णिम इतिहास में जैन दर्शन का अमूल्य योगदान है| जब कल्पवृक्ष लुप्त होने लगे तो जनमानस को जीवनयापन की चिंता होने लगी| ऐसे समय में भगवान ऋषभदेव ने असि, मसि, कृषि, शिल्प, वाणिज्य व कला का अद्भुत ज्ञान प्रदान कर जीवन जीने की कला सिखाई| अपनी दोनों पुत्रियों, ब्राह्मी व सुंदरी, को अंक व लिपि का ज्ञान देकर महिला सशक्तिकरण का एहसास लोगों को करवाया| इसी कारण ब्राह्मी लिपि नामकरण हुआ| आपने न्याय व नीति पूर्वक राज्य कर समस्त सांसरिक सुखों से वैराग्य धारण कर कर्मों की निर्जरा हेतु जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की तथा वन की ओर प्रस्थान किया| आपके साथ हजारों अन्य राजाओं ने भी आपके मार्ग का अनुसरण किया| दीक्षा लेते ही आपने मौन धारण कर लिया|
भगवान आदिनाथ के नाम से आपका उल्लेख लगभग सभी मान्यताओं के प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है|आपके ज्येष्ठ पुत्र चक्रवर्ती भरत ने भी छह खण्ड के राज्य को त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की तथा कर्मों की निर्जरा कर मोक्ष प्राप्त किया| इन्हीं चक्रवर्ती भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा, जिसका उल्लेख विष्णु पुराण में भी मिलता है| हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू जी ने उड़ीसा स्थित खारवेल के शिलालेख पर “भरतस्य भारत” प्रशस्ति देख कर ही इस देश का संवैधानिक नाम भारत किया था| इज़राइल में भगवान ऋषभदेव के माता-पिता नाभिराय व मरुदेवी की पूजा अर्चना भक्तिपूर्वक की जाती है|


















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