वनों को आग से बचाये, आने वाले कल को सुरक्षित बनाये
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
सालेटेकरी/बालाघाट।गर्मी की शुरुआत हो चुकी है।इसी दो से तीन महीनों में वनों में आग लगाई जाती है जिससे पशु, पक्षी, विभिन्न प्रकार के जीव जंतु इस अग्नि में जलकर राख हो जाते है।यहां तक वन में लगी आग को बुझाते बुझाते कई सुरक्षा श्रमिक और वनरक्षक इसमें अपनी आहुति दे चुके हैं जो बहुत ही चिंतनीय है।वनविभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्च से अप्रैल के बीच वनों में आग लगाई जाती है जिसके जिम्मेदार इंसान ही होता है जो कभी जानबूझकर या कभी अनजाने में वनों को आग के हवाले कर देता हैं
जो आने वाले समय मे बहुत ही ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ेगा जिसको शायद ये लोग नही समझते।हालांकि इस बीच वनविभाग मुश्तैदी से वनों की निगरानी करता है लेकिन कहते है न कि सबकुछ वनकर्मियों के ऊपर ही डाल देना बेमानी है।वनों को आग से बचाना, वन्यजीवों की रक्षा करना,ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाना आदि जिम्मेदारी हम सबकी है जिसको हमे निभाना ही चाहिए।वनों में आग लगने का कारण कही न कहीं इंसान ही होता है जो जानबूझकर आग को लगाता है।कभी महुआ बीनने के नाम पर या कभी सफाई के लिए जो अनुचित है।बिरसा दमोह वनपरिक्षेञ के कर्मचारियों व अधिकारियों ने जनता से अपील किया है कि वनों में आग न लगायें, अगर महुआ बीनने में असुविधा होती है तो पेड़ के नीचे की सफाई किया जा सकता है जिससे वनों की सफाई भी होगी और आपका काम भी हो जाएगा और वनों की सुरक्षा में आपकी भागीदारी भी हो जाएगी। बिरसा वनपरिक्षेञ अधिकारी एस. पी.गोस्वामी, वनपाल पंकज रिछारिया,बी.आर. नारनौने,जीवनलाल वरकड़े,बी डी खांडेकर तथा समस्त वनअमला ने आमजन से अपील किया है कि वनों को आग से बचाने में अपनी भागीदारी देकर इस महान कार्य का हिस्सा बने।

















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