स्वयं आत्मनिर्भर होकर दूसरों को आत्मनिर्भरता के गुण सिखाती गरिमा पाठक
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चांपा - आज की नारी अगर चाहे तो अपने पारिवारिक दायित्वों का पूर्ण जवाबदारी के साथ निर्वहन करते हुये भी स्वयं आत्मनिर्भर होकर दूसरे महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता के गुण सीखा सकती है। आज की युवा एक ओर जहां सरकारी नौकरी के लिये एड़ी चोटी एक करने में लगी है। वहीं दूसरी ओर बलौदा निवासी सामान्य परिवार की बहू और एक छोटी सी बच्ची की मां गरिमा पाठक वर्क फ्राम होम के बैनर तले स्वयं आत्मनिर्भर होकर दूसरों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता के गुण सीखा रही है। ये हमेशा से कुछ कर गुजरने की दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाली महिला हैं। उनके इस कार्य में उनके परिवार का पूरा योगदान रहा है। इनके मार्गदर्शन में आज सैकड़ों महिलायें अपने पारिवारिक दायित्वों को सम्हालते हुये रोज पंद्रह सौ रूपये से लेकर तीन हजार रूपये तक कमा लेती हैं। आज महिला दिवस पर गरिमा पाठक ने अरविन्द तिवारी से चर्चा करते हुये बताया कि वे राजनीति शास्त्र , ग्रामीण विकास और योगा तीन विषयों में स्नातकोत्तर की डिग्री ले चुकी हैं। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भरता की सोच उनके मन में पहले से ही थी , इसलिये उन्होंने रियल स्टेट और स्वास्थ्य विभाग में भी कुछ समय सेवा दी है। इसके बाद वर्ष 2018 में उनकी शादी बलौदा में हुई और ससुराल वालों की सहमति से उन्होंने फिर से 2021 में वर्क फ्रॉम होम का कार्य सम्हाला। आज एक छोटी सी बच्ची की मां होकर और अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुये भी वह स्वयं आत्मनिर्भर होकर दूसरों को आत्मनिर्भर बना रही है। महिला दिवस पर उन्होंने अपने संक्षिप्त संदेश में कहा है कि अगर नारी दृढ़ संकल्प कर ले तो वह विषम परिस्थितियों में भी दृढ़तापूर्वक हर कार्य कर सकती है।

















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.