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Friday, March 11, 2022

साप्ताहिक बाजार पांडादाह में पर्चा वितरण किया गया


 साप्ताहिक बाजार  पांडादाह  में पर्चा वितरण किया गया


प्रचार प्रसार छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के तत्वधान में तालुका विधिक सेवा समिति खैरागढ़ द्वारा साप्ताहिक बाजार खैरागढ़ में हां पर्चा वितरण कर दी गई विधिक जानकारी ज्ञात हो कि नेशनल लोक अदालत 12 मार्च को आयोजित होने वाले है जिसके अंतर्गत हाट बाजार पंचायत गली मोहल्ला आगे प्रचार प्रसार कार्यक्रम चल रहा है जिसके अंतर्गत आज दिनांक 10.03.2022 को साप्ताहिक बाजार पांडादाह में जाकर पर्चा वितरण कर लोगों को विधिक जानकारी दी गई जिसके अंतर्गतप्रेस   पैरालीगल वालंटियर गोलूदास   द्वारा  बताया गया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने के लिए महिला संरक्षण अधिनियम 2005 संसद द्वारा पारित किया गया इसका  मूल उद्देश्य यह था कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाना है

 *घरेलू हिंसा क्या है ?* 

शारीरिक दुर्व्यवहार अर्थात शारीरिक पीड़ा या हानि या जीवन या  स्वास्थ्य को खतरा या लैंगिक  दुर्व्यवहार अर्थात महिला की गरिमा का उल्लंघन, अपमान या तिरस्कार करना, या अतिक्रमण करना या मौखिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार अर्थात अपमान, उपहास, गाली देना, आर्थिक दुर्व्यवहार अर्थात आर्थिक या वित्तीय संसाधनों जिसकी वह हकदार है से वंचित करना, मानसिक रूप से परेशान करना यह सभी घरेलू हिंसा कहलाते हैं *

इस कानून के तहत घरेलू हिंसा के दायरे में अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं* 

1. शारीरिक हिंसा जैसे मारपीट करना, थप्पड़ मारना, दांत काटना ठोकर मारना, लात मारना , इत्यादि 

2. लैंगिक हिंसा जैसे बलात्कार अथवा बलपूर्वक बनाए गए  शारीरिक संबंध, अश्लील साहित्य सामग्री देखने के लिए मजबूर करना ,अपमानित करने के लिए दृष्टिकोण से किया गया लैंगिक व्यवहार और बालकों के साथ लैंगिक दुर्व्यवहार ।

 3.मौखिक या भावनात्मक हिंसा जैसे अपमानित करना, गाली देना ,चरित्र और आचरण पर आरोप  लगाना, दहेज के नाम पर प्रताड़ित करना, नौकरी ना करने देना या छोड़ने के लिए मजबूर करना आत्महत्या करने की धमकी देना या मारने की धमकी देना 

4.आर्थिक हिंसा आपके या आपके बच्चों को अपनी देखभाल के लिए धन और संसाधन न देना, आपको अपना रोजगार ना करने देना या रुकावट करना, आपकी आय वेतन इत्यादि आप से ले लेना, घर से बाहर निकाल देना इत्यादि भी घरेलू हिंसा है

 *इस अधिनियम को लागू करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है उनके इस कानून के तहत कुछ कर्तव्य हैं जैसे जब किसी पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी ,सेवा प्रदाता या  मजिस्ट्रेट को घरेलू हिंसा की घटना के बारे में पता चलता है तो उन्हें पीड़ित को निम्न अधिकारों के बारे में सूचित करना है* 

1.पीड़ित इस कानून के तहत किसी भी राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं जैसे कि संरक्षण आदेश, आर्थिक  राहत ,बच्चों के अस्थाई संरक्षण का आदेश ,निवास आदेश या मुआवजे का आदेश ।

2.पीड़ित संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं 

3.पीड़ित निशुल्क कानूनी सहायता मांग कर सकते हैं 

4.पीड़ित भारतीय दंड संहिता के तहत क्रिमिनल याचिका भी दाखिल कर सकती है इसके तहत प्रतिवादी को 3 साल तक की जेल हो सकती है परंतु पीड़िता की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उस पर लगाए गए आरोपों को सिद्ध करें । साथ ही

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