अपने परिवारजनों के साथ होलिका दहन करने के बाद वीरेंद्र सिंह बघेल ने कहा कि होलिका दहन असत्य पर सत्य की जीत है
गौरेला पेंड्रा मरवाही । आज अपने गृह ग्राम -लोहारी घोषित नगर पंचायत में सरपंच और साथियों के साथ होलिका दहन किये
मैं बचपन से अपने मम्मी निर्मला सिंह से ये कहानी सुनते आ रहा हूं कि
होलिका मनाने के विषय में एक पौराणिक कथा है
कहा जाता है कि प्राचीनकाल में हिरण्यकश्यप नामक अत्याचारी , दुराचारी ओर निरंकुश राजा शासक हुआ। उसने अपने शासन काल मे निरंकुशता को इतना बढ़ा दिया था, कि उससे सारी प्रजा कांप उठती थी। वह प्रजा को अपनी बात मनवाने के लिए विवश करने लगा था। उसने स्वयं को ही भगवान मान लिया ।
अपनी सारी प्रजा को भी उसे भगवान के रूप में पूजने ओर मानने के लिए कठोरता पूर्वक दंड दिया करता था।
उसके ऐसा करने पर उसका पुत्र प्रहलाद उसका विरोध करता था। क्योंकि प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और बड़ा उपासक था
उनकी ही उपासना करता था। उसे इस तरह देख कर हिरण्यकश्यप आग बबूला हो जाया करता था।
अपने पुत्र प्रहलाद को अपना परम् विरोधी समझकर हिरण्यकश्यप ने उसे कई प्रकार की यातनाओं से प्रताड़ित किया। उसने जब यह देखा कि प्रहलाद पर किसी भी प्रकार की यातनाओं से उसकी भगवान विष्णु जी की उपासना से मन समाप्त नही हो रहा है। तब उसने अपनी बहन होलिका को यह आदेश दिया कि प्रहलाद को लेकर आग में बैठ जाए। जिससे वह जलकर भस्म हो जाये। ऐसा इसलिए कि होलिका को यह वरदान मिला था कि आग उसका कुछ नही बिगाड़ सकती है। वही हुआ भी। होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गयी। लेकिन प्रहलाद की परम भक्ति ने प्रहलाद को बचा लिया
आग से प्रहलाद का कुछ भी बाल-बांका न कर सकी ओर होलिका को ही जलाकर भस्म कर दिया।
कुलमिलाकर हम निष्कर्ष में जाये तो होलिका दहन असत्य पर सत्य की जीत है
हम सब को अपनी सांकृतिक धरोहर को बचा के रखना चाहिये ' मैं व्यग्तिगत माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी को धन्यवाद देता हूं ' जो तीज त्योहार को छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाते है

















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