संत शिरोमणी नंदा सेन जी महाराज की 722 वी जयंती मनाई गई
पैलीमेटा _ग्राम पैलीमेटा में नाई समाज के जितने परिवार रहते हैं सभी ने आज अपने ईष्ट देव संत शिरोमणी नंदा सेन जी महाराज की 722 जयंती मनाई ।
शिक्षक तुलेश्वर कुमार सेन की मार्ग दर्शन में सेन समाज के युवा कार्यकर्ता सर्वश्री भुनेश्वर सेन,तानसेन सेन,भूपेंद्र सेन ,सुकलाल सेन,दिनेश्वर सेन,जयलाल सेन, पारस सेन,बलदाऊ सेन, बंटी सेन,सीमन सेन,अनिल सेन,आनंद सेन,चंद्रेश सेन,प्रकाश सेन,प्रहलाद सेन ,मोहन सेन आदि समाज के युवा, बुजुर्ग और नारी शक्ति के साथ बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।कार्यक्रम की तैयारी की जिम्मेदारी श्री भुनेश्वर सेन को दिया गया था।
शिक्षक तुलेश्वर कुमार सेन ने संत शिरोमणी नंदा सेन जी महाराज की जीवन परिचय उनका जन्म बैशाख माह के कृष्ण पक्ष के द्वादशी ,उनके पिता चंद्र सेन,माता पद्मा जी ,उनके गुरु रामानंद जी महाराज थे।जिसमे संत नंदा सेन जी महाराज 12 विशेष शिष्यों में स्थान रखते थे विस्तार से बताया। उन्होंने बताया की संत शिरोमणी नंदा जी महाराज भगवत भक्ति में विश्वास करते थे।श्री विष्णु जी की पूजा करते थे ।संतों की सेवा करते थे।दिन दुखी की सेवा को अपना धर्म मान कर चलते थे।
जब नंदा जी संत सेवा में और भजन कीर्तन में व्यस्त हो गए और राज दरबार में हाजिर न हुआ तब एक बार स्वयं भगवान विष्णु नंदा जी का रूप धारण करके राजा की सेवा में हाजिर हो गया था।मेरे कारण मेरे भगवान को आना पड़ा ये सोचकर बहुत पछतावा हुआ था।जबकि राजा जय सिंह आनंदित हो गए और रोग मुक्त हो गए।उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटना क्रमों को समाज के लोगों को बताया।आरती पूजन करके प्रसाद वितरण किया गया।सभी ने एक दूसरे को बधाई दिया। यह जानकारी श्री भुनेश्वर सेन और तुलेश्वर कुमार सेन ने दिया।




















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