(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट। बाघों के नाम से पहचान बनाने वाला बालाघाट जिले में पिछले एक महीने में दो बाघों की हुई मौत से वनविभाग सहित वन्यजीव प्रेमी भी चिंतित है।कभी शिकारियों के द्वारा बाघों का शिकार किया जाता है तो कभी बिजली का करंट लगाकर बाघों को मार दिया जाता है और अब लालबर्रा वनपरिक्षेञ अंतर्गत सोनेवानी चिखलाबड्डी मार्ग पर बीट क्रमांक 430 के जंगल मे एक और बाघ की आपसी लड़ाई में मौत हो गयी जिससे चिंतित होना लाजिमी है।मृत बाघ के शरीर पर मिले जख्म को देखकर अधिकारियों ने बाघों में वर्चस्व को लेकर हुई लड़ाई से मौत का कारण बता रहे हैं।
मृत बाघ के शरीर में हिंसक वन्य प्राणी से संघर्ष के दौरान चोटिल होने के निशान हैं।सभी अंग माैजूद मिले हैं,जिससे अधिकारी शिकार की आशंका से इंकार कर रहे हैं। लालबर्रा वन परिक्षेत्र अधिकारी नितिन पवार ने बताया कि रविवार को वन विभाग को सूचना मिली थी,सोनेवाली चिखलाबड्डी मार्ग पर एक बाघ मृत पड़ा है।सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने पंचनामा कार्यवाही कर मृत बाघ का पोस्टमार्टम कराकर बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया।बाघ की उम्र 18 माह के लगभग बताई जा रही है।शव करीब 10 से 12 घंटे पहले का होना बताया गया।यह मामला रविवार की सुबह का है इसकी जानकारी मिलते ही वन अमला घटना स्थल पर पहुंचकर उक्त कार्यवाही किया।इनका कहना...सोनेवानी-चिखलाबड्डी के जंगल में एक अवयस्क बाघ का शव होने की जानकारी मिली।उसकी मौत की वजह आपसी संघर्ष है।उसके शरीर पर हिंसक वन्य प्राणी से सघर्ष के दौरान आए चोट के निशान दिख रहे हैं।इसकी चलते उसकी मौत हुई है।विवेचना की मंशा से उसका पीएम कराया गया है।बाघ का नियम अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
एनके सनोड़िया,सीसीएफ बालाघाट


















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