आजीविका मिशन से जुड़ने का रविता दीदी को मिला लाभ
मुर्रा एवं मुर्रे के लड्डू बनाने के व्यवसाय से 15 हजार रुपये की मिल रही है आय
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट। जिले के नक्सल प्रभावि क्षेत्र के अंतर्गत लांजी तहसील के ग्राम बेलगांव की रविता दीदी के दिन आजीविका मिशन से जड़ने के बाद बदल गये है। रविता दीदी मुर्रा बनाने एवं मुर्रे के लड्डू बनाने का कार्य करती है और इससे उसे अब हर माह 15 हजार रुपये की शुद्ध आय होने लगी है। आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले रविता दीदी आसपास के गांवों में घूम-घूम कर मुर्रा बेचने का कार्य करती है। लेकिन अब वह घर बैठे ही मुर्रा एवं उससे बने लड्डू बचने का काम कर रही है। इतना ही नही अब वह मुर्रा बनाने की मशीन लगाने की तैयारी में है।
ग्राम बेलगांव बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के नक्सली क्षेत्र में स्थित है। यह ग्राम घने वनो से घिरा आदिवासी बाहुल्य ग्राम है । ग्राम बेलगांव की दुरी विकासखंड मुख्यालय लांजी से 23 किमी एवं जिला मुख्यालय बालाघाट से 85 किमी है। । रविता पहले अपने गांव एवं आसपास के गांवों में मुर्रा बचने का काम करती थी। गांव में जब आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाने का काम चला तो वह भी समूह से जुड़ कर आजीविका मिशन में शामिल हो गई। समूह की अध्यक्ष होने के कारण वह रविता से रविता दीदी बन गई है। रविदा ग्राम बेलगांव के सरस्वती आजीविका स्व सहायता समूह की अध्यक्ष है एवं एकता ग्राम संगठन की बुक कीपर का कार्य कर रही है । आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उसके समूह ने मिशन के जरिये मिले 15 हजार रुपये लेकर मुर्रा एवं मुर्रे के लडडू बनाने व्ययसाय प्रारंभ किया है और इसमें रविता दीदी सफलता की सीढिंया चढ़ने लगी है।
रविता दीदी के परिवार की पहले स्थिति अच्छी नही थी और घर की माली हालात खराब थी। प्रारम्भ में समूह से 02 हजार रुपये की ऋण राशि लेकर मुर्रा की धान खरीद कर अपनी आजीविका चलाती थी और उसके जरिये गांवो में मुर्रा बनाकर बेचने जाती थी धीरे धीरे पैसे इकटठा करके एवं खेती का कार्य करके फिर और समूह से सीसीएल की 10 हजार रुपये की राशि लेकर उस व्यवसाय को आगे बढाकर अपनी आजीविका को बढाया और मुर्रा को बेचकर 15 हजार रुपये का लाभ कमाया। आय बढ़ी तो रविता दीदी ने आसपास के अन्य दूसरे ग्रामों में भी मुर्रा और लडडू बेचने का काम बढ़ा लिया है।
आजीविका मिशन से रविता दीदी के समूह को प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइज योजना से 40 हजार रुपये की राशि संकुल स्तरीय संगठन के माध्यम से मिली है, जिससे वह अपने व्यवसाय को आगे बढाने के लिये मुर्रा निर्माण के लिये मशीन खरीदने की तैयारी कर रही है। आज की स्थिति मे उसके पास ग्राम के आस पास अन्य ग्राम के लोग भी मुर्रा खरीदने आते है जिससे उसकी आय में ईजाफा हो रहा है और एक दिन में करीबन 02 हजार रुपये का मुर्रा बिक रहा है। रविता दीदी द्वारा धीरे धीरे पैसे इकटठा करके संवहनीय आजीविका से अपने परिवार की आर्थिक स्थति में सुधार लाया गया और साथ ही खेती किसानी का कार्य में पति का सहायोग करती है । जिससे एक गरीब परिवार से वह मध्यम आय की स्थिति में है एवं खुशहाली से जीवन यापन कर रहे है। रविता दीदी द्वारा ग्राम संगठन व अन्य समूहों के दस्तावेजों का आडिट भी किया जा रहा है जिससे उसे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है । वर्तमान समय में सभी स्रोतो से रविता दीदी की आय 15 हजार रुपये मासिक हो गई है । मुर्रा बनाने की मशीन लगाने के बाद उसे और अधिक आय होने की अनुमान है।


















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