वैनगंगा नदी का अस्तित्व खतरे में
नदी के सीने में हजारों एकड़ में हो रही खेती
सीएन आई न्यूज सिवनी से छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट
जिले और छपारा नगर के साथ साथ सैकडों ग्रामों की प्यास बुझाने वाली पवित्र वैनगंगा नदी अपना अस्तित्व को बचाने के लिए ही तरस रही है।
दर असल जल सावधान और विद्युत विभाग सहित पट्टा माफिया की मिलीभगत से नदी के बीचो-बीच हजारों एकड़ में अवैध तरीके से खेती की जा रही है।जिसके चलते बैनगंगा नदी अस्तित्व खतरे में है। उल्लेखनीय है कि 1980 के दशक में भीमगढ़ डैम का निर्माण कराया गया था। उसके बाद से ही डैम के डूब क्षेत्र और नदी के दोनों तटों पर पट्टा माफियाओं ने अपने पैर पसारना शुरू कर दिए थे। आज हालात बंद से बदतर होता जा रहा है क्योंकि अब तो बीच वैनगंगा नदी के सोने पर ही अवैध तरीके से हजारों एकड़ में जल संसाधन विभाग और विद्युत विभाग सहित पट्टा माफिया की मिलीभगत से खेती करने का सिलसिला बदस्तुर जारी है। इस पूरा मामले में जिला प्रशासन तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के निकम्मे, लाचार और भ्रष्ट कार्यप्रणाली के चलते वैनगंगा नदी की सुध लेने वाले कोई नजर नहीं आ रहा हैं।
कागजों पर दौड़ रही जल संरक्षण की योजनाएं
बता दें कि नदियों के संरक्षण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन इसकी हकीकत देखना हो तो छपारा नगर से गुजरने वाली वैनगंगा नदी के हालात को देखकर तो नदी संरक्षण की सभी योजनाएं कागजों में ही दौड़ती हुई दिखाई देती हैं। यहां के हालात दिनोंदिन भयावह होते जा रहे हैं। जिसके चलते बैनगंगा नदी पूरी तरह सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। कई जगह पर तो सिर्फ और सिर्फ पानी से भरे हुआ डबरे ही नजर आ रहे है।। जिसके चलते अप्रैल माह से ही सिवनी नगर के साथ-साथ छपारा नगर और आसपास के सैकड़ों ग्रामों में भीषण जल संकट पैदा हो गया है। हमारी मीडिया टीम ने जब वैनगंगा नदी के उद्गम स्थल मुंडारा से लेकर छपारा तक निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। वैनगंगा नदी के उदगम स्थल मुंडारा से लेकर लखनवाड़ा, दिघोरी, बंडोल, और छपारा तक बेनगंगा नदी के तटों पर अभी भी पट्टा माफिया विद्युत और इरीगेशन विभाग की मिलीभगत से हजारों एकड़ में बेतहाशा कब्जा करने के साथ-साथ हजारों में मोटर पंप लगाकर बेधड़क पानी खींचने का खेल बेखौफ जारी है। सबसे ज्यादा खराब हालत छपारा के ऐतिहासिक कर्बला और धड़धडा घाट से लेकर सिद्ध बाबा शिव मंदिर घाट तथा रेस्ट हाउस घाट के साथ-साथ छोटे और बड़े पुल तथा फोरलेन बाईपास के पुल को के आगे माहलवड़ा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जहां बैनगंगा नदी के दोनों तटों और अब तो बैनगंगा नदी के सोने के ऊपर ही जुताई बखरौनी और बोनी करने के साथ-साथ हजारों की संख्या में मोटर पंप लगाकर पानी खींचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।


















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