करगीरोड-स्टेशन की रेल-पटरी पर खाट डालकर बैठने मंत्री-सांसद-विधायक के इंतजार में नगर-संघर्ष-समिति सहित कोटा-नगरवासी।
पिछले 02-सालों से ट्रेनों का स्टॉपेज करगीरोड-स्टेशन में बंद कर दिया गया है..नगर-संघर्ष-समिति-कोटा जमीनी के साथ कानूनी-लड़ाई रहा है।
रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट
कोटा...रेलवे-विभाग के द्वारा बिना पूर्व सूचना के 22-से 23-यात्री-ट्रेनें रद्द करने के बाद से राजधानी-रायपुर से लेकर न्यायधानी-बिलासपुर सहित ऊर्जा-नगरी-कोरबा तक महासंग्राम मचा हुआ है.
*मुख्यमंत्री-जी व जिले के प्रभारी-राजस्व-मंत्री जी करगीरोड-सहित छोटे-स्टेशनों की आवाज भी न दबे :-----*
ट्रेनों को लेकर रेलवे प्रबंधन के खिलाफ राजधानी-रायपुर न्यायधानी-बिलासपुर सहित उर्जा नगरी-कोरबा की आवाज बुलंद करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व-मंत्री के साथ-साथ विधायक-जनप्रतिनिधियों को उन छोटे-छोटे स्टेशनों की आवाज भी बुलंद करने की आवश्यकता है..जहा कोविड-संक्रमण कॉल का बहाना बनाकर रेलवे-बोर्ड रेलवे-प्रबंधन के द्वारा पैसेंजर-एक्सप्रेस ट्रेनों की परिचालन बंद कर दिया गया है..पिछले 02-सालों से संक्रमण-कॉल का बहाना बनाकर मार्च-2020 से करगीरोड-स्टेशन में पूर्व में रुकने वाली एक्सप्रेस-पैसेंजर का परिचालन बंद कर दिया गया जो की वर्तमान में बदस्तूर जारी है..कोविड-के संक्रमण कम हो जाने के बाद नगर-संघर्ष-समिति कोटा के द्वारा ट्रेनों के पुनः से स्टॉपेज को लेकर सितंबर-2021 में आवेदन-ज्ञापन सौंप जाने के बाद 19-सितंबर-2021 को रेल-रोको आंदोलन किया गया..आंदोलन से हड़बड़ाए
रेलवे-प्रबंधन द्वारा आश्वासन का झुनझुना थमा दिया..29-सितंबर को सांसद-विधायक की उपस्थिति में बिलासपुर महाप्रबंधक-व-डीआरएम रेलवे को पुनः से ज्ञापन सौंपा गया..पुनः से आश्वासन का लॉलीपॉप थमा दिया गया..30-नवंबर-2021 में एक बार पुनः से नगर संघर्ष-समिति से जुड़े एक सदस्य के द्वारा भूख हड़ताल पर बैठने के बाद रेल-आंदोलन में तेजी आई..स्टेशन परिसर के बाहर लगातार 13-दिसंबर तक नगर संघर्ष समिति से जुड़े सभी संगठनो ने सांकेतिक-धरना प्रदर्शन जारी रखा..14-दिसंबर को एक बार पुनः से नगर-संघर्ष-समिति में शामिल कोटा-नगर के सभी संगठनो ने ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक करगीरोड-स्टेशन से मालगाड़ी में लोडिंग-अनलोडिंग बंद की मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन किया।
*ट्रेनों तो नही रुकी-08-लोगो के खिलाफ अपराध-पंजीबद्ध 01-लाख से ऊपर का जुर्माना अलग से :---*
देश 1947-मे आजाद हो चुका है..पर रेलवे में अभी भी अंग्रेजी-कानून का साया हावी है..रेलवे-बोर्ड व रेलवे-प्रबंधन आज भी आम-भारतीयों को अंग्रेजी-कानून से डराने का कार्य कर रही है..14-दिसंबर को आंदोलन खत्म के कुछ दिनों के बाद रेलवे के द्वारा आंदोलनकारियो को समंस भेजा गया...ढाई हजार से ऊपर आंदोलन-कारियो में केवल 08-लोगो के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया वो भी शांतिपूर्ण-तरीके से किए गए आंदोलन पर आंदोलन में यूपी-बिहार की तरह न ही स्टेशनों में तोड़फोड़ की गई-? न ही रेल-इंजन या फिर बोगियों को फूंका गया-? न ही पटरियों को कोई नुकसान पहुचाया गया-? उस समय रेलमंत्री ने कोई कार्यवाही नही किए जाने की बात कही थी यूपी-बिहार के छात्रों को अपना भाई बताया था-?नगर संघर्ष समिति के आंदोलन-कारियो के द्वारा किसी भी प्रकार से रेलवे की संपत्ति को नुकसान नही पहुचाया गया..बावजूद रेलवे-बोर्ड-रेलवे प्रबंधन ने 01-लाख से ऊपर जुर्माने की रकम का ताम्रपत्र भेज दिया..अपनी बुनियादी-जायज मांगो को लेकर नगर-संघर्ष-समिति में शामिल आंदोलनकारी शायद
अफगानिस्तान-पाकिस्तान-बर्मा-म्यांमार के दुश्मन देश के रहे होंगे..शायद इस वजह से नगर संघर्ष समिति के लोगो के लिए "भाई-वाला "ट्वीट" रेलमंत्री का नही आ पाया या फिर रेलमंत्री को रेलवे-प्रबंधन ने बताने में देरी की होगी पिछले 02-सालों से ट्रेनों के स्टापेज नही होने से कोटा नगर व आसपास के इलाके के रहने वाले लोग हजारों युवा-बेरोजगार हो गए-?आवागमन बाधित होने से दूरदराज-आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों की पढ़ाई छूट गई-?व्यपार कोटा नगर का खत्म हो गया-?रोजगार के लिए बिलासपुर व्यपार बिहार जाने वाला नगर का युवा सड़क मार्ग से आवागमन करने के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर अपने हाथ पैर तुड़वाकर घर बैठा हुआ है-? ट्रेनों का ठहराव रेलवे बंद करें-?पैसेंजर ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन बनाकर भारी-भरकम राशि रेलवे वसूले-?बावजूद जुर्माने की रकम आंदोलन-कारियो से चाहिए-?कायदे से तो पिछले 02-वर्षों से ट्रेनों के ठहराव नही होने से कोटा-नगर के लोगों को होने वाले नुकसान की भरपाई रेलवे-प्रबंधन को करना चाहिए---पर रेलवे को बोले कौन-? कौन सुनने वाला है-? मीडिया से जुड़े पत्रकार गण कलम चलाए जा रहे हैं..चलाए जा रहे हैं....पर न तो रेलवे-प्रबंधन संज्ञान ले रहा है-?और ना ही कोटा-विधानसभा-संसदीय-क्षेत्र के सांसद-विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि-गण-?
*आने वाले दिनों में अगर ट्रेनों का ठहराव पुनः से करगीरोड-स्टेशन में नही किया जाता है तो नगर-संघर्ष-समिति में शामिल सभी कोटा-नगर के संघटनों के द्वारा एक बार पुनः से आंदोलन की रूपरेखा के साथ-साथ नगर पंचायत की सीमा में बड़े-बड़े फ्लेक्स लगाने की तैयारी कर रही है "करगीरोड-स्टेशन में ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक सत्ता-पक्ष-विपक्ष के बड़े नेताओं-मंत्रियों सांसद-विधायक का नगर में प्रवेश वर्जित बावजूद आते हैं तो जवाबदेही उनकी स्वयं मि "ट्रेन नही तो वोट नही"।*



















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