मोहन द्विवेदी की रिपोर्ट
जांजगीर चांपा - जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुये एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन कड़कनाथ मुर्गी पालन पर कृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर एवं कृषि मौसम विभाग इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकासखण्ड पामगढ़ के ग्राम ससहा में किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये डॉक्टर जी०के०दास विभागाध्यक्ष कृषि मौसम विभाग इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषको को बताया गया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से कृषको को को खेती में काफी समस्या आ रही है। वर्षा की अनिश्चितता निरंतर बनी हुई रहती है इन सब को ध्यान में रखते हुये कृषक खेती के साथ-साथ खेती किसानी से जुड़े दूसरे आयामों पर विचार करें। इसी तारतम्य में कड़कनाथ पालन एवं मछली पालन पर जोर दिया गया l कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ० राजीव दीक्षित ने कृषको को संबोधित करते हुये बताया कि अनुसूचित जाति उप योजना अंतर्गत ग्राम ससहा मुड़पार एवं कोसीर में सात कृषको का चयन कर कड़कनाथ पालन एवं मछली पालन पर कार्य किया गया है , उस कार्य को आगे बढ़ाने हेतु आज जागरूकता कार्यक्रम रखा गया।
उन्होंने कृषको से आह्वान भी किया कि वह इन इकाईयों पर भ्रमण करें एवं इन्हें अपनाने का प्रयास करें। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ ज्ञानेंद्र सूर्यवंशी ने पशु विभाग द्वारा कड़कनाथ एवं बायलर मुर्गों पर तुलनात्मक जानकारी से कृषको को रूबरू कराते हुये कृषकों को कड़कनाथ पालन हेतु प्रेरित किया।उन्होंने बताया कि कड़कनाथ मुर्गों का मांस एवं रुधिर काला होता है जिसकी वजह से लोगों के बीच इसकी पसंद ज्यादा है और यह बाजार में अधिक भाव में भी बिकता है।साथ ही साथ उन्होंने मछली पालन पर भी जोर दिया। केंद्र के वैज्ञानिक शशिकांत सूर्यवंशी ने कृषको को धान में होने वाली माहो की समस्या एवं किस्मों के चयन की जानकारी देते हुये कृषको से आग्रह किया की जलवायु परिवर्तन को देखते हुये आर्थिक लाभ बढ़ाने हेतु कृषक मुर्गी पालन एवं मछली पालन तथा साग सब्जी की उत्पादन पर भी ध्यान देने की बाय कही। इस कार्यक्रम में लगभग 50 से 60 किसानों ने भाग लिया।


















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