महंगाई की मार से बैगा आदिवासियों की थाली से सब्जी दाल गायब
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बिरसा/बालाघाट।महंगाई ने जनता की कमर तोड़ दिया है जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित बैगा आदिवासी हुए हैं।जिनके पास चावल तो है लेकिन इसके साथ खाने के लिए सब्जी या दाल नही है जिससे क्षेत्र में निवासरत बैगा आदिवासियों की थाली से सब्जी दाल नदारद हो गयी है।समली बाई ने बताया कि मेरे पति का देहांत होने से घर चलाने में बहुत परेशानी हो रही थी छोटे छोटे बच्चों के भरणपोषण के लिए मै मेहनत मजदूरी कर किसी तरह से घर चला रही थी लेकिन सभी सामानों के मूल्य में हुई बेतहाशा वृद्धि से घर चलाना मुश्किल हो गया है जिससे घर मे कभी 'पेज' (पेज एक प्रकार का पेय पदार्थ होता है जो चावल का बनता है)तो कभी सूखा चावल खाकर गुजारा कर रहे हैं।बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़ दिया है जिससे घर चलाना माध्यम वर्गीय परिवार के लिए बहुत मुश्किल हो गया है।इस मामले में राम सिंग तिलगाम ने बताया कि घर मे बनने वाली सब्जी दाल में कटौती कर एक समय दाल तो एक समय सब्जी बनाकर जैसे तैसे परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं अगर शीघ्र ही बढ़ती महंगाई पर अंकुश नही लगा तो आमलोग इससे खासा प्रभावित होंगे।कंद मूल खाकर अपना जीवन यापन करने वाले बैगा आदिवासियों ने बताया कि शासन चावल तो दे रही है लेकिन इसके साथ सब्जी दाल का दाम इतना ज्यादा बढ़ गया है कि चावल के साथ नमक मिलाकर खाने पर मजबूर हैं जिससे हमारा पेट तो भर जाता है लेकिन दाल सब्जियों से मिलने वाले लाभ से हम वंछित हो रहे है जो आने वाले समय पर हमारे जीवन में पड़ने वाला है।बैगा आदिवासियों ने शासन से महंगाई पर अंकुश लगाने की अपील किया है।


















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