महेंद्र शर्मा बंटी छ्त्तीसगढ़ रिपोटर -डोंगरगढ़ मारवाड़ी गौड़ ब्राह्मण समाज के द्वारा
अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर्व को बड़े धूमधाम के साथ मनाया इस अवसर पर भगवान परशुराम की पूजा अर्चना तथा जय घोष किया गया तथा शहर में शोभायात्रा निकाली गई, शोभायात्रा भव्य झांकियां, बैंडबाजे,शहनाई ढोल नगाड़ों के साथ शुरू हुई शोभायात्रा प्राचीन महावीर मंदिर से शुरू हुई शोभा यात्रा शहर के मुख्य मार्गो से होती हुई वापिस महावीर मंदिर प्रांगण में पहुची जहाँ शोभायात्र का समापन किया गया शोभा यात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ स्वागत हुआ एवं जगह-जगह स्वागत किया गया वही कार्यक्रम के दौरान समाज के बुजुर्गो ने नई पीढ़ी को भगवान परशुराम के जीवन का वर्णन किया,समाज के बुजुर्गो ने बताया कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम अपनी वीरता के लिए जाने जाते थे। कहा कि आज के दिन जन्म लेने वाले नवजात बहुत वीर और गुणों में श्रेष्ठ होते हैं। परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर पुलिस जवान भी शोभायात्रा में तैनात रहे। शोभायात्रा शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुई।
बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हर वर्ष परशुराम जन्मोत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अपना 6वां अवतार लिया था। इसी वजह से इस दिन अक्षय तृतीया के साथ परशुराम जयंती भी सेलिब्रेट की जाती है। इस साल 3 मई को परशुराम जयंती मनाई गयी।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का जन्म धरती पर हो रहे अन्याय, अधर्म और पाप कर्मों का विनाश करने के लिए हुआ था। उन्हें सात चिरंजीवी पुरुषों में से एक माना जाता है। परशुराम जी का जन्म के वक्त राम नाम रखा गया था। वे भगवान शिव की कठोर साधना करते थे। जिसके बाद भगवान भोले ने प्रसन्न होकर उन्हें कई अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे। परशु भी उनमें से एक था जो उनका मुख्य हथियार था। उन्होंने परशु धारण किया था इसलिए उनका नाम परशुराम पड़ गया।




















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