तेंदू पत्ता की तुड़ाई शुरू,पत्ता तोड़ते दिखे बैगा आदिवासी
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बिरसा/बालाघाट।वनोपज से भरपूर बालाघाट जिले में हरा सोना कहे जाने वाला तेंदू पत्ता की तुड़ाई की शुरुआत हो चुकी है।तेंदू पत्ता यानी जिससे बीड़ी बनाई जाती है जो देश के कोने कोने तक भेजी जाती है।तेंदू पत्ता की तुड़ाई से लेकर बेचने तक की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है।
पत्ता तोड़ने वाले बिसतो बाई ने बताया कि दिन निकलने के पहले घर के सभी लोग जंगल जाकर पत्ते की तुड़ाई करते हैं जिसको घर लाकर गड्डी बनाने का कार्य किया जाता है जिसमे बच्चे से लेकर बड़े तक मिलकर इस काम को अंजाम देते हैं।गड्डी बनाने के बाद खरीदी केंद्र में ले जाकर गिनवाने यानी बेचने की प्रक्रिया होती है।गांव का अमरू बैगा ने बताया कि मेहनत के हिसाब से मेहनताना कम मिलता है।जंगल में भूखे,प्यासे और नंगे पांव रहकर पत्ता तोड़ते है जहाँ हमे जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।कभी भालू के काटने से या कभी सांप बिच्छू जैसे जहरीले जीवो से हमारी जान को खतरा बना रहता है।अपनी जान की परवाह किये वगैर हम तेंदू पत्ता की तुड़ाई करते हैं।जिसका फायदा बड़े बड़े ठेकेदार उठाते हैं।पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में चार सौ रुपए प्रति सैकड़ा तेंदू पत्ते का रेट है तो हमारे यहां तीन सौ क्यों?देखा जाय तो इसके बात में दम है।
बैगाओं के लिए पत्ता तुड़ाई खास
तेंदू पत्ते की तुड़ाई का सभी लोगो को इंतजार रहता है लेकिन सबसे ज्यादा बैगा आदिवासियों को इस समय का इंतजार होता है क्योंकि बैगा परिवारों में तेंदू पत्ते को बेचकर अर्जित किया गया धन से शादी विवाह से लेकर बड़े से बड़ा कार्य संपन्न किया जाता है।तेंदू पत्ता से मिले धन से आने वाले बारिश के चार महीनों के लिए घर के लिए राशन आदि का भंडारण करने में मदद मिलती है।इतना सब कुछ मिलने के बाद भी तेंदू पत्ता तोड़ने वालों के लिए मेहनताना कम ही है,क्योंकि इसी तेंदू पत्ते को बेचकर ठेकेदार मालामाल होते हैं और तेंदू पत्ता तोड़ने वाला जस का तस ही रहता है।ग्रामीणों ने शासन से मांग किया है कि तेंदू पत्ते में प्रति सैकड़ा कम से कम पांच सौ रुपये के रेट से खरीदी की जाय जिससे हमें भी थोडी बचत करने में मदद मिले।



















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