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Tuesday, June 28, 2022

नवरात्रि में गुप्त नवरात्र का भी है विशेष महत्व


नवरात्रि में गुप्त नवरात्र का भी है विशेष महत्व

बिलासपुर से सुरेंद्र मिश्रा 

बिलासपुर.....नवरात्रि की अपने एक विशेष महत्व होता है। वर्ष भर में मान्यताओं के अनुसार चार नवरात्रि मनाई जाती है इस पर्व को तंत्र विद्याआषाढ़ और साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है , इसमें 9 महाविद्याओं और तंत्र शक्ति की पूजा की जाती है . 15 जून से आषाढ़ माह का प्रारंभ हो चुका है . इस माह में गुप्त नवरात्रि 2022 मनाई जाएगी . पूरे साल में 4 नवरात्रि होते हैं इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रमुख माना गया है । 


आषाढ़ नवरात्री 2022 तिथि वह शुभ समय

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होगा . प्रतिपदा तिथि 29 जून 2022 , बुधवार को सुबह 8:21 से शुरू होगा और यह अगली सुबह 30 जून को 10:49 से तक मान्य होगा . पंचांग में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की उदया तिथि 30 जून निर्धारित की गई है।आषाढ़ नवरात्रि 2022 कलश स्थापना मुहूर्त 

पंचांग में बताया गया है कि कलश स्थापना 30 जून को होगी . पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहेगा . पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:57 मिनट तक होगा . मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापित करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं . इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ - साथ गुरु पुष्य योग और अमृत सिद्धि योग भी रहेगा . जो 1 जुलाई को दोपहर 1:07 से अगली सुबह पांच 5:27 तक रहेगा . इस साल गुप्त नवरात्रि का प्रारम्भ 30 जून से शुरू होगा , जिसका समापन 8 जुलाई को होगा।


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022 तिथि सूची 1. कलश स्थापना , मां शैलपुत्री पूजा : 30 जून , गुरुवार 2. मां ब्रह्मचारिणी पूजा : 01 जुलाई , शुक्रवार 3. मां चन्द्रघन्टा पूजा : 02 जुलाई , शनिवार 4. मां कुष्माण्डा पूजा : 03 , जुलाई , रविवार 5. स्कन्दमाता की पूजा : 04 जुलाई , सोमवार 6. मां कात्यायनी पूजा : 05 जुलाई , मंगलवार 7. मां कालरात्रि पूजा : 06 जुलाई , बुधवार 8. दुर्गाष्टमी , महागौरी पूजा , सन्धि पूजा : 07 जुलाई , गुरुवार 9. मां सिद्धिदात्री पूजा , नवरात्रि पारण : 08 जुलाई , शुक्रवार।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त- 

इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 05 बजकर 26 मिनट से लेकर 06 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।


गुप्त नवरात्रि में होती है 10 महाविद्याया की आराधना।

गुप्त नवरात्रि में भी मां दुर्गा के अलग - अलग स्वरूपों की विधि - विधान से पूजा की जाती है भुवनेश्वरी , माता चित्रमस्ता , मां, गुप्त नवरात्रि के दौरान भी चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह ही घट स्थापना भी की जाती है . गुप्त नवरात्रि के दिन साधक को प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान - ध्यान कर लेना चाहिए। देवी दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को एक लाल रंग के कपड़े में रखकर लाल रंग के वस्त्र या फिर चुनरी आदि पहनाकर रखना चाहिए . सुबह - शाम मां दुर्गा की पूजा करें और उन्हें लौंग और बताशे का भोग लगाएं . इसके बाद मां को श्रृंगार का सामान जरूर अर्पित करें . सुबह और शाम दोनों समय पर दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें . ' ॐ दुं दुर्गायै नमः ' मंत्र का जाप करें . इसके साथ एक मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज रोपें , जिसमें प्रतिदिन उचित मात्रा में जल का छिड़काव करते रहना होता है . मंगल कलश में गंगाजल , सिक्का आदि डालकर उसे शुभ मुहूर्त में आम्रपल्लव और श्रीफल रखकर स्थापित करें.फल - फूल आदि को अर्पित करते हुए देवी की विधि - विधान से प्रतिदिन पूजा करें . गुप्त नवरात्रि के आखिरी दिन देवी दुर्गा की पूजा के पश्चात् देवी दुर्गा की आरती गाएं . पूजा की समाप्ति के बाद कलश को किसी पवित्र स्थान पर विसर्जन करें।

गुप्त नवरात्रि के दिनों में क्या करें- क्या नहीं

 मान्यता है कि नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य नियम का पालन करें . सबसे पहला नियम यह है कि गुप्त नवरात्रि में देवी की साधना पूरी तरह से गुप्त तरीके से करना चाहिए . भूलकर भी की जाने वाली साधना - आराधना का प्रचार या महिमामंडन नहीं करना चाहिए . इन दिनों तामसिक भोजन का परित्याग करें। शक्ति की साधना में देवी की साधना हमेशा एक निश्चित समय और एक निश्चित स्थान पर करनी चाहिए .. साधना करने के लिए हमेशा अपने आसन का ही प्रयोग करें . कभी भी दूसरे के आसन का प्रयोग बैठने के लिए नहीं करना चाहिए . शक्ति की साधना के लिए लाल रंग का उनी आसन अत्यंत ही शुभ माना गया है . ज्योतिष अनुसार कुश की चटाई पर शैया करें . गुप्त नवरात्रि में शक्ति की साधना के दौरान हमेशा एक निश्चित संख्या में देवी के मंत्र का जप करना चाहिए..गुप्त नवरात्रि में पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें . शक्ति की साधना के लिए चंदन की माला को श्रेष्ठ माना गया है . यदि चंदन की माला न मिले तो आप रुद्राक्ष की माला से जप कर सकते हैं , लेकिन ध्यान रहे कि जप हमेशा अपनी माला से करें . भूलकर भी गले में पहनने वाली माला का प्रयोग देवी के जप के लिए न करें।

गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि - • 

गुप्त नवरात्रि में भगवती की पूजा करने से पहले सभी चीजें अपने पास रख लें ताकि पूजा में किसी प्रकार का विघ्न न आए और आप पूरे मनोयोग से शक्ति की साधना कर सकें . गुप्त नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहूर्त में सबसे पहले भगवती के जप - तप और व्रत का संकल्प लें और उसके . बाद विधि - विधान से घटस्थापना करें . इसके बाद प्रतिदिन सुबह - शाम देवी धूप - दीप आदि दिखकर पूजा और मंत्र जप करें . मां भगवती की पूजा में लाल रंग के फूल , लाल सिंदूर और लाल रंग की चुनरी का प्रयोग करें , यदि आप मां काली की विशेष साधना कर रहे हैं तो काले रंग के वस्त्र एवं आसन का प्रयोग करें . इसी प्रकार मां सरस्वती की साधना करते समय पीले रंग के वस्त्र एवं पीले रंग का आसन का प्रयोग करें . जिस प्रकार नवरात्रि की अष्टमी या नवमी वाले दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन किया जाता है , बिल्कुल उसी तरह गुप्त नवरात्रि पर भी देवी स्वरूप कन्याओं को आदर के साथ बुलाकर उनकी पूजा करें और उन्हें प्रसाद , फल आदि खिलाकर कुछ दक्षिणा के साथ विदा करें . मां आपकी मनोकामना पूर्ण करे।

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