पर्यटन स्थल कबीर चबूतरा में भारी अव्यवस्था, महंगे खाने से बेस्वाद हुआ जायका...
—जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही से सूरज यादव कि खास रिपोर्ट
CNI NEWS जीपीएम / गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. जीपीएम जिला प्रशासन के द्वारा पर्यटन स्थल कबीर चबूतरा से संबंधित धुआंधार प्रचार-प्रसार से पर्यटक तो आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन कबीर चबूतरा पहुंचने के बाद उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अन्य स्थानों के अलावा जीपीएम जिले से भी पर्यटक अधिक से अधिक संख्या में कबीर चबूतरा पहुंच रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा आमंत्रित राजधानी रायपुर के वेंडर के द्वारा पर्यटको को 400- 400 रुपये में घटिया स्तर का खाना खिलाया जा रहा है जिससे पर्यटकों में भारी आक्रोश दिखाई देता है।
जश्न-ए-जाएका में ना तो रेट सूची लगाई गई है और ना ही खाने की कीमत से संबंधित कोई जानकारी ग्राहकों को दी जाती है. खाना ग्राहकों को स्वयं अपने हाथों से ही निकालना पड़ता है लेकिन ग्राहक जैसे ही खाना पूरा करते हैं, कि सामने वेंडर का बिलिंग ऑपरेटर खाना खत्म होने के पहले ही 400 रुपये का बिल थमा देता है. ग्राहक जब इससे संबंधित जानकारी नहीं होने पर इसका विरोध करने लगते हैं तो रायपुर के वेंडर द्वारा उन्हें खूब धमकाया जाता है, जिससे ग्राहक परेशान होकर जीपीएम जिले के जिला प्रशासन को कोसते नजर आते हैं. जायका के भीतर कोविड-19 से संबंधित गाइडलाइन चश्पा तो किया गया है लेकिन उसका खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है. वेंडर का एक भी कर्मचारी मास्क लगाए दिखाई नहीं देता है. वहीं कबीर चबूतरा में स्थित जायका के लिए स्थानीय वेंडरों को दरकिनार कर रायपुर के वेंडर को टेंडर दिया जाना समझ से परे है, यहां के स्थानीय वेंडर काम की तलाश में देश के अलग-अलग राज्यों में भटक रहे हैं. युवा वर्ग रोजगार व स्वरोजगार के लिए लगातार जिले से बाहर दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं, और स्थानीय पर्यटन स्थलों में इन बेरोजगार नवयुवकों की उपेक्षा करना जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. राजधानी रायपुर के वेंडर द्वारा चलाए जा रहे जश्न-ए-जाएका में साफ सफाई और शुद्धता का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है।
जगह जगह खाने की जूठी प्लेटें रख दी जाती है जिसमें मक्खियां भिन्न-भिनाती रहती हैं. वही मक्खियां फिर खाने में जाकर बैठ जाती हैं. बिल के पेमेंट के लिए पीओएस मशीन का उपयोग बिलकुल भी नहीं किया जा रहा है. पार्किंग के लिए ठीक से व्यवस्था नहीं है पर्यटक गाड़ियों को यत्र-तत्र खड़ी कर देते हैं, जिसका जितना बड़ा ओहदा वह उतनी ही सामने करीब में गाड़ी पार्क करते हैं. जिला प्रशासन द्वारा जश्न-ए-जायका मानसून फूड फेस्टिवल का आयोजन दो दिनों के लिए दिनांक 23 और 24 जुलाई को रखा गया था.

लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्री, नेताओं के 23 जुलाई को ही आगमन के बाद जश्ने-ए- जायका 24 जुलाई को पूरी तरह से वीरान दिखाई देने लगा है. जीपीएम जिले से जाने वाले पर्यटक महंगे खाने का विरोध करते हैं और कबीर चबूतरा से बाहर सड़क पर ही बैठ कर चाय-नाश्ता करते दिखाई देते हैं. यह आदिवासी बहुल जिला के लिए पर्यटन के नाम पर मात्र एक छलावा है।
सूरज यादव
CENTRAL NEWS INDIA CHANNEL
जिला ब्यूरो/संवाददाता
गौरेला पेंड्रा मरवाही छ.ग.
9617435197






















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