गुरु पुर्णिमा महापर्व पर रामाश्रम सत्संग मथूरा उप केंन्द्र भिलाई में श्री कुंज बिहारी सिंग आचार्य के सानिध्य में संपन्न ।
सी एन आई न्यूज साल्हेवारा से चन्द्रभूषण यदु की रिपोर्ट।
साल्हेवारा - गुरु पुर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर रामाश्रम सत्संग मथूरा उप केंन्द्र भिलाई में श्री कुंज बिहारी सिंग आचार्य के सानिध्य में हजारों साधकों ने सत्संग समारोह का लाभ उठाया पुरे छत्तीसगढ़ के साधक अग्रसेन भवन सेक्टर 6 में इकत्रित होकर गुरु पुर्णिमा महापर्व में गुरु और शिष्य परम्परा का संगम में गुरु की शक्ति को ग्रहण किये ।
आचार्य श्री कुंजबिहारी सिंग जी गुरु पुर्णिमा को गुरु और शिष्य का अटुट बंधन बताया जो शिष्य को आज के दिन गुरु याद करता है गुरु अपने शिष्य को परखता है उसकी साल भर की साधन को गुरु शक्ति से औऔर मजबुत करता है कभी साधक राह भटक जाता है उसे फिर से रास्ता दिखाता है जैसे ईश्वर के यहाँ न्याय होता जैसा कर्म वैसा फल पर गुरू के यहाँ दया होती गुरु शिष्य पर दया कर उसके पापों का क्षय कर देता है जबकी ईश्वर न्याय करता है ईश्वर और गुरु में बड़ी फर्क है जो साधक गुरु का दामन पकड़ लिया है वो दौड़ दौड़ कर गुरु के पास जाता है अपनी गुनाह के लिये बार बार क्षमा याचना करता है गुरु बड़े दयालु होते है शिष्य को माफ करते हुये उसके ऊपर अहैतुकी कृपा कर उसके सारे पाप धो डालते है जो साधक गुरु पर श्रद्धा और विश्वास कर उनके बातो पर अमल करते हुये डटा रहता है उनका सारे दुख तकलीफ क्षण मात्र में गुरु हर लेते है जैसे चिड़िया के दो पंख होते है यदि एक पंख कट जाये तो वो उड़ नही सकता और दोनो पंख कट जाये तो जहां का तहां पड़ा कराहता है वैसे श्रद्धा और विश्वास ये साधक के दो पंख है जो साधक गुरु पर श्रद्धा और विश्वास कर अपने लक्ष्य पर चलता रहता है उसे मंजिल मिल जाती है जो सत्संग में आ जाता है उसका कल्याण निश्चित है जो गुरु को डरता है वो संसार में निर्भय होकर चलता है वो संसार से नहीं डरता और जो गुरु से भय नही खाता वो संसार में डरपोक की तरह जीता है उसे हर समय डर सताता रहता है जो अपने गुरु से भय और भरोसा के साथ जीवन ब्यतीत करता है कभी जीवन में धोखा नही खाता उसका तरक्की होते रहता है
यह गुरु पुर्णिमा पर्व पर गुरु दया का भंडार खोल देता है गुरु शिष्य पर सब कुछ लुटा देना चाहता है शिष्य को माला माल कर देना चाहता गुरु दाता है आओ हम सबमिलकर गुरु भगवान के चरणों में प्रसाद अर्पण करें उनसे कहें हम तो अधम अभिमानी जीव है आपकों हम नही देख पाते आपही दया कर हम सबो का कल्याण करें अपने वरदहस्त के छाया में शीतलता प्रदान कर गुरु पुर्णिमा की चांद की तरह शीतल शांत जीवन ब्यतीत करे आपका आशीर्वाद से यह प्रसाद अर्पण करें दो मिनट ध्यान करें । रामाश्रम सत्संग के आचार्य गणों की उपस्थिति रही श्री रुद्र प्रसाद मिश्रा जी ,देवादास साहु जी ,गजेन्द्र ठाकरे जी बख्सी साहब जी एवं समस्त रामाश्रम सत्संग के भाई बहनों साधको सेवको के बीच परम शांती का ज्ञान वर्षा से आंनदित सराबोर हृदयागम करते रहे गुरु पुर्णिमा का दुसरी सभा संपन्न हुआ




















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.