गोधन न्याय योजना किसानों के हित में अच्छी योजना - पीएम मोदी
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति भवन में नीति आयोग की शासी परिषद की सातवी गवर्निंग काउंसिल के बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कोविड पश्चात भारत की ओर समग्रता से बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों से फसल विविधीकरण पर ध्यान देने को कहा। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का संघीय ढांचा और सहकारी संघवाद कोविड संकट के दौरान दुनियां के लिये एक मॉडल के रूप में उभरा है। हमें इसे और मजबूत करना होगा।बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति , जी-20 , स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्रियान्वयन के साथ ही देश को तिलहन-दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने व शहरी प्रशासन के मामले पर विचार-विमर्श हुआ।बैठक में पीएम ने विशेषकर छत्तीसगढ़ के गोधन न्याय योजना का जिक्र करते हुये कहा कि गोबर से तैयार हो रहे वर्मी कम्पोस्ट खेतों की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक है , यह किसानों के हित में अच्छी योजना है। बताते चलें जुलाई 2019 के बाद से गवर्निंग काउंसिल की यह पहली व्यक्तिगत बैठक है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच एक नई दिशा में काम करने के लिये तालमेल बैठाने को लेकर रणनीति बनाई गई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक से संबंधित एजेंड़ा बिन्दुओं के अतिरिक्त राज्यहित से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने माँग की है कि शहरों के निकट ग्रामीण क्षेत्रों और बीस हज़ार से कब आबादी के शहरों में मनरेगा लागू की जाये। वही सीएम बघेल ने कोयला समेत मुख्य खनिजों की रॉयल्टी दर में संशोधन का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री बघेल ने इस बैठक में कहा कि राज्यों के संसाधनों पर दबाव बढ़ा है , केंद्रीय कर में राज्य का हिस्सा बढ़ाया जाना चाहिये। वहीं नक्सल उन्मूलन के लिये तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर किये गये खर्च की प्रतिपूर्ति भी सीएम बघेल ने माँगी , यह राशि क़रीब बारह हज़ार करोड़ रुपये है। इस बैठक में सीएम बघेल ने जीएसटी क्षतिपूर्ति का मुद्दा उठाया , उन्होंने जीएसटी कर प्रणाली से राज्यों को राजस्व हानि का ब्यौरा दिया।मुख्यमंत्री बघेल ने कर्मचारियों की नवीन पेंशन योजना में जमा राशि की वापसी की भी मांग बैठक में रखी। सीएम बघेल ने आग्रह किया कि जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान जो जून 2022 के बाद समाप्त हो जायेगा उसे आगामी पाँच वर्षों के लिये जारी रखा जाये। बैठक में ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने कहा कि उनका राज्य लगभग हर साल प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ईमानदारी से ओडिशा को एक विशेष फोकस वाला राज्य बनाने और आपदा प्रूफिंग के लिये धन आवंटित करने का अनुरोध किया।पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पानी , किसानों के कर्ज , एमएसपी की कानूनी गारंटी , नहर परियोजना , बुढ़ा नाले की सफाई (लुधियाना) , बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) और स्वास्थ्य क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया। इस बैठक के एजेंडे में फसल विविधीकरण और तिलहन- दालों और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-स्कूली शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-उच्च शिक्षा का कार्यान्वयन और शहरी शासन समेत अन्य मुद्दे शामिल रहे। नीति आयोग के इस बैठक में आसाम , छत्तीसगढ़ , त्रिपुरा , मध्यप्रदेश , पश्चिम बंगाल , पंजाब , राजस्थान , गुजरात , हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , उत्तरप्रदेश समेत बाकी राज्यों के सीएम , केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल , नीति आयोग के उपाध्यक्ष , नीति आयोग के फुल टाइम मेंबर्स और केंद्रीय मंत्रियों में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह , केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल , सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी , वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण , केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बैठक का बहिष्कार किया है। साथ ही बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी स्वास्थ्य कारणों के चलते बैठक में नहीं पहुंचे। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस बैठक में अनुपस्थित रहे।
वहीं बैठक के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बैरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी परमेश्वरण अय्यर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री ने शुरुआती उद्बोधन कोविड-19 के दौरान केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सहयोग की चर्चा की और कहा कि बेहतर कोविड-19 एक आदर्श बन गया है। प्रधानमंत्री ने राज्यों से कोविंद पश्चात के भारत और भविष्य तथा वर्ष 2047 के भारत के लिये समग्र विकास की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने बताया कि बैठक में जी-20 सम्मेलन , फसलों के विविधीकरण , शहरी प्रशासन , उच्च शिक्षा और ‘2047 में भारत’ पर गहन मंथन किया गया। उन्होंने बताया कि बैठक में अगले वर्ष देश में होने वाली जी- 20 की बैठक के आयोजन और राज्यों की भूमिका पर भी विचार विमर्श किया गया। इसके अलावा फसलों का विविधीकरण , राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन , उच्च शिक्षा , शहरी प्रशासन , इंटरनेट कनेक्टिविटी और ‘वर्ष 2047 में भारत’ पर व्यापक रूप से विचार विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि अगला वर्ष 2023 भारत के लिये महत्वपूर्ण होगा। इस वर्ष भारत में जी-20 सम्मेलन का आयोजन भारत की अध्यक्षता में होगा। उन्होंने कहा कि बैठक में जी -20 सम्मेलन में राज्यों के योगदान पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि नयी शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सभी राज्यों ने सहमति जताई है। बैठक में केंद्र और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के बीच संघवाद की भावना के अनुरूप माहौल बनाने, अमृत काल में देश की विकास यात्रा में चुनौतियों की पहचान करने एवं उनका समाधान तलाशने पर जोर दिया गया। बैठक के एजेंडे में तिलहन और दालों में आत्मनिर्भर बनना भी शामिल रहा। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारत खाद्य तेल में आत्मनिर्भर हो। प्रधानमंत्री ने आयात को कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिये राज्यों से 3टी - व्यापार , पर्यटन , प्रौद्योगिकी - को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। इसी क्रम में अय्यर ने बताया कि बैठक के दौरान सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों ने अपने अपने क्षेत्र के सर्वोत्तम कार्यों और प्रक्रिया की जानकारी दी। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति , केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने -जी 20 सम्मेलन की राज्यों के लिये उपयोगिता पर प्रस्तुति दी।


















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