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Thursday, August 4, 2022

बेटे नमन वर्मा को सरकार, जनप्रतिनिधि व समाजसेवियों का नहीं मिला सहयोग - पिता दुष्यंत वर्मा कहा दुर्लभ बीमारी के चंगुल में, चिकित्सा सुविधा के कर रहे हैं मांग

 बेटे नमन वर्मा को सरकार, जनप्रतिनिधि व समाजसेवियों का नहीं मिला सहयोग - पिता दुष्यंत वर्मा


 कहा दुर्लभ बीमारी के चंगुल में, चिकित्सा सुविधा के कर रहे हैं मांग



*राजनांदगांव ।* मोतीपुर निवासी दुष्यंत वर्मा के बेटे नमन वर्मा जोकि एक दुर्लभ बीमारी के चंगुल में फंसा हुआ लेकिन राज्य सरकार, जनप्रतिनिधि व समाजसेवियों से लगातार सहयोग की अपील करते हुए थक गए लेकिन सहयोग नहीं के बराबर मिला। यहां पर हम आपको बताते हुए चलते हैं कि मोतीपुर वार्ड नम्बर 03 के निवासी दुष्यंत वर्मा का परिवार के एकलौते बचे बेटे नमन वर्मा जो की स्टेट हाई स्कूल में 10 वीं कक्षा का छात्र है। जिनको दुर्लभ बीमारी ने जकड़ा हुवा है। जिसे मेडिकल साइंस नॉर्मोस्टिक हाइपोक्लोराइट एनीमिया विद थ्रोमबॉसिस (एप्लास्टिक एनेमिया) कहती है। इसमें होता यह है कि बच्चे के नाक - कान - मुंह से खून निकलता है। माता-पिता के ऊपर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है। वही बेटे के टेस्ट करा-करा कर सब चीज लुटा चुके है। परिवार इलाज कराने में विफल है। पिता ड्राइवर और माता सिलाई मशीन का काम करती है। बेटे नमन वर्मा का इलाज दक्षिण भारत के वेल्लोर शहर के CMC हॉस्पिटल मेडिकल संस्थान में चल रहा है जहाँ माँ - बेटे ने रुक कर तमाम टेस्ट करा चुके है, माँ से बोनमैरो लेकर बेटे नमन वर्मा में ट्रासप्लाट करना बाकी है इस टेस्ट में माँ का सेंपल लिया गया जो आश्चर्य पूर्वक 100 में 100 मिलान हुवा है। डॉक्टरों ने इसे अजूबा माना है वही डॉक्टरों ने इलाज का स्टिमेंट बनाया है 15 लाख रुपये का है। 


*पिता ने बेचा गहने अब घर बेचने की हो रही है तैयारी*  

                                                                                                      दुष्यंत वर्मा घर में रखे गहने बेचकर दो लाख पांच हजार रुपये एकत्रित किए। परिवार वालों से कर्ज के रूप में छः लाख रुपये और मोहल्ले वालों से पचास हजार पांच सौ रुपये मिले। घर बेचने की तैयारी चल रहा है। क्योंकि हॉस्पिटल में फिलहाल अभी 5 लाख रुपये इलाज के नाम पर जमा करना होगा। वहां रुक कर खाने पीने की चीजें भी बहुत महंगी है। उसके लिए भी पैसे की जरूरत पड़ेगी। इसलिए घर को बेचने की तैयारी चल रहा है। राज्य सरकार, जनप्रतिनिधि व समाजसेवियों का अगर सहयोग मिल जाता तो बेटे नमन वर्मा को बचाया जा सकता है। लेकिन जब नमन वर्मा ठीक होकर घर पहुंचेंगे तो उनके सिर पर छत नहीं होगा। क्योंकि इलाज के नाम पर पिता अपनी सारी संपत्ति बेच चुका होगा।

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