मरवाही (कछार) का समुदलाई प्रकृति सुंदरता का परिचायक है —वीरेंद्र सिंह बघेल...
—जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही से सूरज यादव कि खास रिपोर्ट
CNI NEWS जीपीएम/बचपन से मरवाही (कछार) का समुदलाई के बारे में बड़े बुजर्गो से सुनते थे,ये कुंड की गहराई का अता पता नही है,और देखने सुनने और वहाँ घूमने से कुंड में कूदने से मन को एक तृप्ति मिलती थी।
पर जो भी इस कुंड को देखने में अद्भुत सुखद अनुभव मिलता है.
प्रकृति की गोद में आने के बाद बहुत सांत्वना, साहस और आराम महसूस होता है | प्रकृति भगवान का स्वरुप है, इसकी विशाल सुंदरता मानव के लिए आर्शीवाद से भरा हुआ है | जैसे बहती हुई नदियाँ, गगन भेदी ध्वनि,शुद्ध हवाएँ, झरनें,जीवंत फूल और ऊँचे पहाड़ जो प्राकृतिक सुंदरता को मनमोहक और खूबसूरत बनाती है,
जंगलों के बीच बसा ये पर्यटन निश्चित रूप से विकसित करने की जरूरत है जहाँ लोग आकर इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में तनाव दूर कर सके,सैकड़ो वर्ष से यहाँ मेला लग रहा है अब वो समय आ गया कि मरवाही और इस जिला में तमाम पर्यटनों को विकसित किया जाए।
प्रकृति के द्वारा हमें कई प्रकार के फुल, पह्सू – पक्षी, पेड़ – पौधे, आसमान, जमीन, नदी – नाले, समुद्र, पहाड़, पठार इत्यादि. प्रदान किया हैं।
ईश्वर ने इन सबही चीजों का निर्माण मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया हैं,इसलिए कभी भी मनुष्य को प्राकृतिक सम्पदा को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
इस प्रकृति ने मनुष्य को बहुत कुछ दिया हैं | परन्तु मनुष्य उसकी रक्षा करने के आलावा हमेशा इसका दुरूपयोग करने लगा हैं।



















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