कोरोना के चौधी लहर से बचाव की तैयारी से पहले सिविल अस्पताल का हाल।
आक्सीजन सिलेंडर और कंसट्रेटर की व्यवस्था लेकिन कोविड सेंटर नही।
23 फीसदी को ही प्रीकाशन डोज, जांच भी तीन माह से बंद।
मंगलवार को माकडिल में सिलेंडरों और कंसंट्रेटर की भर जांच।
खैरागढ़ कोरोना के कहर से पहले बचाव की तैयारी में जुटीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के पास तैयारी तो पूरी है। लेकिन पिछले तीन | माह से कोविशील्ड वैक्सीन नहीं होने के चलते प्रौकाशन डोज पूरी तरह बंद है । कोरोना की जांच नहीं हो पा रही है। स्थिति अगर गड़बड़ाई तो नए जिला निर्माण के बाद कोविड सेंटर के लिए भी भटकना पड़ सकता है। मंगलवार को सरकार के आदेश के बाद कोरोना से निपटने की तैयारियों का माकडिल भी किया गया। लेकिन चौथी लहर से निपटने यहाँ तैयारियों की बजाय कमियों ज्यादा सामने आई है।
76 सिलेंडर, 49 कंसेंटेटर मौजूद लेकिन आक्सीजन भरने भिलाई भरोसे
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ब्लाक में सबसे ज्यादा प्रभावित सामने आए मौतें भी इसी दौरान सबसे ज्यादा हुई। इसके बाद व्यवस्था बनने लगी । फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के 76 आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था है। इसमें 40 बड़े और 36 छोटे सिलेंडरशामिल है । 49 आक्सीजन कंसेंट्रेटर भी विभाग के पास मौजूद है । बताया गया कि सभी चालू हालत में पूरी तरह ठीक ठाक है । लेकिन सिलेंडर रखने की व्यवस्था नहीं होने के चलते आक्सीजन सिलेंडर को सिविल अस्पताल के साथ साथ आसपास के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, पाडादाह, बाजार अतरिया, जालबांधा में रखवाया गया है। आक्सीजन सिलेंडर भरने की व्यवस्था भी आसपास की बजाय भिलाई के निजी केन्द्र से होती है ।
75 सौ प्रभावित 166 ने गंवाई जान
पिछले तीन कोरोना लहरों में खैरागढ़ में कुल 7500 से अधिक लोग प्रभावित हुए । इसमें शहर के 22 सौ और ग्रामीण इलाकों के 5 हजार से अधिक लोग शामिल रहे। इस दौरान पूरे ब्लाक में 166 लोगों ने कोरोना में अपनी जान भी गंवाई । इसके बाद भी टीकाकरण में तेजी और अन्य व्यवस्था बनाने अभियान चला। इसका फायदा मिला। लेकिन अगस्त माह के बाद से प्रीकाशन डोज पूरी तरह बंद कर दिया गया। जिसके कारण अब तक 23 फीसदी लोगों को ही प्रीकाशन डोज लग पाया है। 77 फीसदी आबादी को अब भी प्रीकाशन डोज नही दिया जा सका है। मिली जानकारी अनुसार अगस्त माह के बाद से कोरोना की जांच भी नही हो रही है। जांच किट की पर्याप्त व्यवस्था होने के बाद भी जांच पूरी तरह बंद है ।
कोविड सेंटर नहीं, अस्पताल में ही बनाई व्यवस्थाब्लाक मुख्यालय में कोरोना प्रभावित मरीजों को अलग इलाज की व्यवस्था देने पालीटेकनीक कालेज के छात्रावास में कोविड सेंटर बनाया गया था जहाँ एक हजार से अधिक मरीजों का पिछले लहर में इलाज किया गया। कलेक्ट्रेट बनने के बाद छात्रावास में अब 'पालीटेकनीक का संचालन हो रहा है ऐसी स्थिति में ब्लाक मुख्यालय में कोविड सेंटर नही है । सिविल अस्पताल में 30 बेड को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है लेकिन स्थिति बिगड़ी तो मरीजों को राजनांदगांव तक भेजने की नौबत आ सकती है। I
कोरोना से बचाव के लिए आक्सीजन सिलेंडर, कंसेंट्रेटर को व्यवस्था है। सिविल अस्पताल में ही 30 बेड आक्सीजन युक्त तैयार किए गए है। प्रीकाशन डोज 23 फीसदी ही हो पाया है। जांच भी नही हो रही ।
डा विवेक बिसेन, बीएमओ सिविल अस्पताल खैरागढ़
*सीएनआई न्यूज़ खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट*


















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