श्री कृष्ण बाल लीला का वर्णन सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
सी एन आई न्यूज दल्ली राजहरा से हर्ष रामटेके की रिपोर्ट
नगर स्थित मां अंगरमोती मंदिर वार्ड नं 2 के पास चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के छटवें दिन भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला, रास लीला, गोवर्धन पर्वत एवम् श्रीकृष्ण रूखमणी विवाह की कथा सुनाई गई। कथा वाचक पंडित तोरण महाराज जी ने बुधवार को कथा प्रसंग के दौरान भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओ के साथ गायों के चराने, गांव की गोपिकाओ के घरों में घुसकर दूध दही एवम् माखन खाने सहित अन्य बाल लीलाओ की कथा सुनाई।
उन्होंने श्रोताओं को भगवान श्री कृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया की भगवान का प्रथम विवाह रूखमणी के साथ हुआ । रूखमणी स्वयं लक्ष्मी माता हैमित्रो राजा परिचित कथा श्रवण कराते समय श्री शुक्राचार्य जी महाराज दो बार समाधिस्थ हो गए थे एक ब्रम्हा लोक लीला मे दूसरी बार सुदामा का प्रसंग आने पर
सुदामा चरित श्री कृष्ण सुदामा दोनो गुरुकुल में मिले और दोनो साथ साथ विद्या ग्रहण किए और अच्छे मित्र बन गए । एक दिन दोनो वन मे गए लकड़ी लाने उसी समय गरज के साथ पानी गिरा तो भगवान श्री कृष्ण बोले सुदामा जोरो की भूख लगी है गुरू मां ने जो चने दिए हैं पोटली में दोनो मिलकर खाते है तो सुदामा बोले वो पोटली नीचे गिर गया पूरे चने खराब हो गए ।श्री कृष्ण तो अंतर्यामी है उससे कोई चीज छुपा नही है दोनो बालक गुरुकुल आ गएदोनो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद अपने अपने घर चले गए ।उसके बाद सुदामा के जीवन में घोर गरीबी आई, उस गरीबी को देखकर गरीबी भी घबरा गई ।सुदामा की पत्नी सुशीला बोली आपके बचपन के मित्र हैं द्वारकाधीश वही हमारी गरीबी दूर कर सकते है,मैं सुनी हू पंडितो का बहुत मानसम्मान करते हैं सुदामा इसके लिए तैयार नहीं थे पर पत्नी की जिद के कारण चावल की पोटली लेकर चले गए।वहा श्री कृष्ण सुदामा को देखकर गदगद हो गए उसको अपने गले लगा लिए और महल में लाए बहुत सेवा किए। सभी के जीवन में मित्र होनी चाहिए और मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा जैसी होनी चाहिए।।।




















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