विश्व का पहला मंदिर है जहां श्री गणेश जी की त्रिनेत्र प्रतिमा विराजमान हैं
सी एन आई न्यूज़ के लिए पुरुषोत्तम जोशी्
राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले के रणथंभौर में स्थित यह दुनिया का पहला त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर है। यह मंदिर लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
गणेश जी को प्रत्येक हिन्दू परिवार द्वारा घर पर कोई भी शुभ कार्य होने पर प्रथम पूज्य श्री त्रिनेत्र गणेश जी को निमंत्रण भेजा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर उसे दूर करने की विनती श्रृद्धालु और भक्त यहां पत्र भेजकर गणेश जी से करते हैं।
प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में निमंत्रण पत्र और चिट्ठीयां यहां पहुंचती है।
मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र गणपति जी को सौंप दिया था, और इस तरह भगवान महादेव की सारी शक्तियां गणेश जी में निहित हो गई।
महागणपति अत्यंत विशिष्ट व भव्य है
जो त्रिनेत्र धारण करते हैं।
रणथंभौर के इस मंदिर में भगवान श्रीगणेश जी को भारत का प्रथम गणेश कहते हैं। मान्यता है कि हर बुधवार को यहां पूजा करने विक्रमादित्य भी आंतें है।
यहां श्री गणेश जी की स्वयं भू प्रकट प्रतिमा मिली।
महाराजा हमीर देव चौहान ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।
महाराज हमीर देव चौहान व अलाउद्दीन खिलजी का युद्ध 1299-1301ईस्वी के बीच रणथंभौर में हुआ।इस दौरान किला दुश्मनों से घिरा रहा और दुर्ग में खानेपीने की सामग्री समाप्त होने लगी तब गणेशजी ने हमीर देव चौहान को स्वप्न में दर्शन दिए और यहां पूजा करने के लिए कहा जहां वर्तमान में श्रीगणेश जी की प्रतिमा है।
यहां सच्चे मन से मांगी हुई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।



















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