केदारनाथ धाम
बाबा के दर्शन से होती है ,मनोकामना पूरी ।
सी एन आइ न्यूज़ -पुरुषोत्तम जोशी ।
उत्तराखंड -हिमालय पर्वत की गोद
में स्थित केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल है।साथ चार धाम, केदारनाथ, गंगोत्री यमुनोत्री, बद्रीनाथ में से एक है।
यह मंदिर अप्रैल से नवंबर माह में दर्शन के लिए खुलता है ।
केदारनाथ भगवान शिव का मंदिर लगभग 3000 साल पुराना है साहित्यों में भी मंदिर के स्थापना की सही तिथि का उल्लेख नहीं है ।
श्रीकेदारनाथ बाबा के दर्शन के लिए श्रृद्धालुओं को 16किलोमीटर की यात्रा के लिए गुप्तकाशी, फाटा,और सिरसी से हेलीकॉप्टर से यात्रा करने की सुविधा उपलब्ध है ।
अन्य श्रृद्धालुओं द्वारा, घोड़े, खच्चर, पालकी,पिट्ठू (बास्केट) पैदल चलकर यह यात्रा पूर्ण की जाती है ।
केदारनाथ धाम तीर्थ दूधिया सफेद मंदाकिनी नदी के पास एक अत्यंत ही मनमोहक और लुभावने स्थान पर 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।
केदारनाथ मंदिर देश भर के श्रृद्धालुओं की आस्था का केंद्र है,।
मान्यता के एवं पौरोणिक कथाओं के अनुसार मंदिर का निर्माण भाई पांडवों द्वारा किया गया था ।केदारनाथ मंदिर की
आधुनिक संरचना 8वी शताब्दी ईस्वी में हिन्दू गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा उसी स्थान पर किया गया ।
16जून 2013 की रात आई प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपाया था ,जलप्रलय से कई मजबूत ईमारतें ताश के पत्तो कि तरह बह गई थी ,लेकिन बाबा केदारनाथ के मंदिर को विशेष क्षति नही पहुंची
इस जल-प्रलय में पीछे पहाड़ी से पानी के बहाव में लुढ़क कर आई विशाल चट्टान मंदिर के पीछे थम गई और उस चट्टान के रुकने से बाढ़ का जल दो भागों में विभक्त हो गया और मंदिर सुरक्षित हो गया ।
लेकिन इस जलप्रलय में
हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
केदारनाथ मंदिर उद्घाटन तिथि अक्षय तृतीया के शुभ दिन और महाशिवरात्रि पर घोषित की जाती है। और कपाट बंद होने की तिथि दीपावली त्यौहार के बाद भाई दूज के दिन होती है ।
इन तिथियों के बीच बीच पूरे भारतवर्ष ही नहीं विदेश से भी श्रृद्धालु लाखों की संख्या में पहुंचकर बाबा केदारनाथ के दर्शन करते हैं ।



















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