बद्रीनाथ धामब द्रीनाथ मंदिर चार धामों में से एक है।
सी एन आइ न्यूज -पुरुषोत्तम जोशी ।
उत्तराखंड -उत्तराखंड के चमोली जनपद में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर हिन्दू देवता विष्णु भगवान को समर्पित मंदिर है। और साथ ही चार धामों में से एक है।
इस धाम के बारे में एक कहावत है कि ,जो जाए बदरी,वो ना आए ओदरी,,याने कि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता हैं ।उसे पुनः माता के उदर यानि गर्भ में फिर नहीं आना पड़ता ।
शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को जीवन में एक बार बद्रीनाथ के दर्शन जरूर करना चाहिए ।बद्रीनाथ को पुराणों में दूसरा बैकुंठ कहा जाता है, एक बैकुंठ
क्षीर सागर है जहां भगवान विष्णु निवास करते हैं ।मान्यता के अनुसार यह कभी भगवान शिव का निवास स्थान था। लेकिन भगवान विष्णु ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था।
इस बद्रीनाथ धाम में लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों की मौजूदगी मंदिर के पट खुलने पर रहती है।
समुद्र तल से ३१३३ मीटर की उंचाई पर स्थित है ।शीत ऋतु मे सर्द मौसम होने के कारण मंदिर के पट वर्ष के छ: माह बंद रहते हैं ।अक्षय तृतीया के दिन मंदिर के कपाट दर्शन हेतु खुलता है और दीपावली के दूसरे दिन कपाट बंद होते हैं ।
बद्रीनाथ मंदिर के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं, जो रावल कहलाते हैं इन्हें ब्रम्हचर्य का पालन करना होता है ।
बद्रीनाथ धाम भारत का सबसे व्यस्त तीर्थ स्थल है ।यहाँ भारत ही नहीं विदेश से भी श्रृद्धालु दर्शन के लिए आते है ।



















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