बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के पंडरा पथरा में एक शिक्षक के भरोसे सरकारी स्कूल,अंधेरे में है छात्रों का भविष्य
बिलासपुर से सुरेंद्र मिश्रा
बच्चों को पढ़ाने के लिए पंडरा पथरा के स्कूल में एक ही शिक्षक
कोटा विकासखंड के ग्राम पंडरा पथरा मे एक शिक्षक के भरोसे सरकारी स्कूल चल रहा है तो नोनिहाल कैसे पढ़ेंगे? यह सबसे बड़ा सवाल है. जिले के पंडरा पथरा गांव के शासकीय विद्यालय मे बच्चे पढ़ते हैं ऐसे में विद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधेरे में आ गया है. स्कूल में पढ़ाने वाला कोई भी शिक्षक नहीं है.
बिलासपुर जिले में इन दिनों सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव के तहत नामांकन चल रहे हैं और इस सरकारी स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है.अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार स्कूल में नामांकन कैसे पूरा होगा और जैसे तैसे नामांकन कार्यक्रम हो भी गया तो विद्यार्थियों की पढ़ाई कैसे होगी. पूरा मामला देखा जाए तो विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है.राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव जैसे कार्यक्रम चलाकर जहां बच्चो को शिक्षा से जोड़ने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. जबकि स्थानीय शिक्षा विभाग की मौजूदा कार्यप्रणाली देखने मात्र से ही लगता है कि इन्हें बच्चो के भविष्य से कोई सरोकार ही नही रह गया है.
ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय में पांच पद स्वीकृत थे.जिनमें पहले 3 शिक्षक 1 शिक्षिका लगे हुए थे. अभी कुछ दिन पहले एक शिछक का प्रमोशन होने के बाद उनको मझवानी भेज दिया गया है.वहीं एक शिक्षक व शिक्षिका ट्रांसफर कर बिलासपुर चले गए एक शिक्षक को जिला शिक्षा अधिकारी ने जिला कार्यालय पुस्तकालय पर लगा रखा है इस पंडरा पथरा स्कूल में एक शिक्षक है।
जिला अधिकारियों को भी सरपंच प्रतिनिधि रामचंद्र गन्धर्व ने कराया अवगत रामचंद्र गन्धर्व बताते हैं कि कई बार स्कूल में शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग से लेकर अन्य जिला अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं.उसके बावजूद विद्यालय में शिक्षकों की संख्या नही बढ़ाई गई.पिछले कुछ दिनों से एक शिक्षक के भरोसे ही स्कूल चल रहा है.जिसे कोई देखने वाला भी नही है.शिक्षकों के ओर भी पद होने के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा यहां अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नही की जा रही है. ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सभी विषय की सम्पूर्ण शिक्षा और ज्ञान नहीं मिल पा रहा है.
वही पंडरा पथरा के उपसरपंच ने कहा विद्यालय में अभी एक ही शिक्षक कार्यरत हैं.जिसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को अवगत करा कर विद्यालय में शिक्षकों के कमी के बारे में बताया। वर्तमान में आत्मानंद के नाम पर रहे सहे शिक्षकों को भी मूल शाला से हटा दिया जा रहा है शिक्षा है अथवा मजाक यह तो यही हुआ कि अगर शिक्षकों की पूर्ति हुई तो कहीं भारत का भविष्य कहीं ज्यादा होशियार न हो जाए फिर राजनीति चमकाने वालों का क्या होगा कुछ तो गंवार जरूरी है सरकार और शिक्षा विभाग की सोंच तो फिलहाल की स्थिति को देखकर यही लगता है।


















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