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Saturday, July 1, 2023

जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आधुनिकीकरण के बाद भी दिक्कतें आ रही है जिसका सरलीकरण बहुत आवश्यक है। सैकड़ों अभिभावकों और दर्जनों शिक्षकों से मिलकर जिला पंचायत सभापति विप्लव साहू ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बधेल को कलेक्टर के माध्यम से पत्र लिखकर इस दिशा में जरूरी संशोधन की मांग की है।

 सी एन आई न्यूज़ छत्तीसगढ़ से संजू महाजन


खैरागढ़ : जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आधुनिकीकरण के बाद भी दिक्कतें आ रही है जिसका सरलीकरण बहुत आवश्यक है। सैकड़ों अभिभावकों और दर्जनों शिक्षकों से मिलकर जिला पंचायत सभापति विप्लव साहू ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बधेल को कलेक्टर के माध्यम से पत्र लिखकर इस दिशा में जरूरी संशोधन की मांग की है। जिसमे विशेषकर ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र के लिए बहुत ज्यादा भटकना पड़ रहा है। यह एक राज्य स्तरीय समस्या बन गई है, जब जाति प्रमाण पत्र बनाने की जब नौबत आती है


तो केवल प्राथमिक शाला के दाखिल-खारिज पंजी में अंकित विवरण, जाति की सत्य प्रतिलिपि मांगी जाती है, यह प्रक्रिया जटिल होने के साथ-साथ स्कूल के शिक्षकों के ऊपर भी व्यर्थ ही कार्य का बोझ बढ़ाने व रिस्क उठाने जैसी समस्या है, इस बात को नीचे लिखे बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है।

(1) यह कि अभिभावक के द्वारा दाखिल खारिज पंजी की सत्य प्रतिलिपि मांगे जाने पर प्रधानपाठक व शिक्षकों को अपने शैक्षणिक कार्य व शाला प्रबंधन को छोड़कर उस 15-20 साल पुराने रिकॉर्ड को ढूंढने में व्यर्थ ही समय जाया करना पड़ता है। कीमती पंजी की जेरॉक्स कॉपी करवाकर संबंधित को देने की, हमारे हजारों स्कूल दूरस्थ अंचल में बसें हैं जहां अभी भी शिक्षक पग डंडियों से स्कूल जाते हैं, अब सोचने वाली बात है ये जेरॉक्स कॉपी कब देगा, कैसे देगा? इतने संवेदनशील पंजी को वह अभिभावक को भी नही दे सकता की वह जेरॉक्स करवा ले, पंजी गुम गया, तो भला उसका जिम्मेदार कौन होगा? स्कूल में भी वह सुविधा नही हैं की वहां जिरोक्स मशीन हो।

(2) आज संबंधित शाला में जो शिक्षक पदस्थ है वह जरूरी नहीं की 20 साल पहले था वही है कई कई शिक्षकों की मृत्यु,सेवानिवृत्ति, स्थानांतरण हो चुका होता है। 

(3) बड़ी समस्या दाखिल-खारिज पंजी में जाति के कालम में मात्रा या वर्ण के जरा भी आगे पीछे होने से शाम को मान्य नहीं किया जा रहा है। तत्कालीन समय में लिखने वाले शिक्षक से भी त्रुटि संभावित है, अगर आंशिक कहीं त्रुटि होती है तो उसी को आधार बनाकर आमजन को अपने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए बेवजह परेशान होना पड़ता है।


संभावित समाधान जो बेहतर हो सकता है


- यह कि दाखिल-खारिज पंजी की जगह गांव में जाति का पंचनामा करवा कर सरपंच सचिव के हस्ताक्षर युक्त प्रमाण पत्र को मान्य किया जाय।

- यह की जैसे जन्म प्रमाण पत्र का स्थाई समाधान हो चुका है क्योंकि अस्पताल,ग्राम पंचायत,नगर पंचायत,पालिका,निगम आदि का मान्य रहता है।उसी प्रकार जाति प्रमाण पत्र भी जन्म के साथ ही बन जाए।

- स्कूलों की दाखिल खारिज पंजी की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए प्राथमिक कक्षाओं की अंकसूची में अंकित जाति को ही आधार बना दिया जाए, इससे शिक्षक और अभिभावक व्यर्थ ही परेशान होने से बच जायेंगे।

समस्या की गंभीरता को देखते हुए इस पर त्वरित समाधान का उपाय जनहित में जरूरी है।

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