सावन में महाकाल राजा के दर्शन करने रोजाना देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुभक्त पहुंच रहे हैं, श्री महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में एक दक्षिणमुखी मंदिर क्यों इतना खास-उज्जैन
सी एन आई न्यूज़ से संजू महाजन
मध्य प्रदेश :- उज्जैन प्रसिद्ध मंदिर - श्री महाकालेश्वर 12 द्वादश ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान में एक है,बाबा महाकाल का मंदिर अतिप्राचीन है, कहा जाता है कि 'जो महाकाल के भक्त हैं उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता" यह बात हम सभी जानते हैं महाकाल राजा के देश-विदेश में भी अनेकों भक्त हैं
मिली जानकारी के अनुसार
किंवदंती-महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर एक बड़ी ही अनोखी कहानी जुड़ी हुई है अवंतिका नाम से एक रमणीक नगरी थी,जिसे आज हम उज्जैन नगरी के नाम से जानते हैं,और भी अनेकों नाम से जाने जाते हैं, यहां नगरी भगवान शिव को अतिप्रिय है
पुराणों व ग्रंथों में सुनने-देखने को मिलता है
मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पालनहार नंद जी की आठ पीढ़ी पूर्व हुई थी, 12 ज्योतिर्लिंगों मे बाबा महाकाल दक्षिणमुखी में विराजमान हैं,मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर से कर्क रेखा गुजरी है, इसलिए इसे पृथ्वी का नाभिस्थल भी माना जाता है
शिवपुराण के कोटिरुद्रसंहिता में भी उल्लेख विस्तार से वर्णन किया गया है
उज्जयिनी में चंद्रसेन नामक एक महान राजा थे, श्री महाकालेश्वर के परम भक्त थे,उनका एक सखा राजा मणिभद्र चंद्रसेन को चिन्तामणि नामक महामणि प्रदान किया जिसे हमेशा धारण करके रखता था, उन्हीं दिनों उस श्रेष्ठ नगर में एक ग्वालिन आईं जिसके एक पांच वर्ष के पुत्र थे, चंद्रसेन को पूजा ध्यानमग्न देखकर वह गोपबालक भी शिव की पूजा-अर्चना हेतु प्रेरित हुआ और एक सुन्दर पत्थर को शिवलिंग मानकर अपने घर के एकांत स्थान में बैठकर भक्तिभाव में लीन हो कर तदनन्तर शिव की आराधना स्तुति करने लगा चरणों में मस्तक झुकाकर प्रणाम कर महादेव को बारंबार पुकारने लगा, सौभाग्य की बात है नन्हेंबालक को कोई लौकिक या वैदिक मन्त्र जाप नहीं जानता था,बिना मंत्रोच्चार के बालक की पुकार सुनकर करूणासागर दिव्य ज्योति स्वरूप श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए और बालक को कुल की कीर्ति बढ़ाने उत्तम फल प्राप्ती वरदान दिया और कहा द्वापर में आठ पीढ़ी में नन्द उत्पन होंगे जिनके यहां साक्षात भगवान श्रीहरि नारायण उसके पुत्ररूप श्रीकृष्ण नाम से अवतार लेंगे, और आज से गोपबालक श्रीकर के नाम से जाने जाओगे कहेकर वरदान दिया,तब से महाकाल राजा उज्जैन में स्वयं साक्षात विराजमान हैं!
*बालक की भक्ति देखकर शिव के 11वे रुद्र अवतार हनुमान जी भी प्रकट हुए*
शिवस्वरूप हनुमान जी दर्शन देकर बालक को गोद में बैठाकर कहा जो फल ऋषि मुनियों की तपस्या करने पर भी प्राप्त नहीं होता वह एक नन्हें बालक की भक्ति आराधना से शिव कृपा प्राप्त हुआ है यह कहकर आशीर्वाद दिए और आज भी साक्षात हनुमान जी उज्जैन में स्वयं विराजमान हैं !
पौराणिक कथाओं की मानें तो यह मंदिर हजारों वर्षों से भी पुराना है इस मंदिर का विस्तार
राजा विक्रमादित्य ने करवाया था उस समय राज्य की राजधानी हुआ करता था,प्राचीन समय की बात है राजाभोज राज्य करते थे वह बड़े दानी और धर्मात्मा थे वह ऐसा न्याय करते कि दूध और पानी अलग अलग हो जाते हैं जैसे, बाबा महाकाल का परम भक्त था उज्जैन नगर से इनका भी इतिहास से काफी जुड़ा हुआ है एक समय की बात है वेदप्रिय नाम का एक ब्राह्मण रहता था वह हर रोज पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिपूर्वक पूजन किया करते थे उसी समय एक राक्षस के अत्याचारों से प्रजा-पीड़ितों ने भगवान शिव का आह्वान किया भगवान शिव साक्षात धरती फाड़कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए और राक्षस का वध किया,और महाकाल राजा श्रद्धालुभक्तों की भक्ति को देखकर श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में विराजमान हो गए ! उज्जैन-महाकाल राजा की ब्रह्ममुहूर्त में पूजा आरती विधिवत तरीके से मंत्र के उच्चारण द्वारा भस्म का श्रंगार चढ़ाई जाती है पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं,उज्जैन महाकाल राजा की नगरी में कोई भी राजा या मंत्री रात नहीं गुज़ारते यह बातें सुनने को मिलती है उज्जैन का राजा स्वयं महाकाल है!
'अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,, 'काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का,, कालों के काल महाकाल राजा की महिला अद्भुत है द्वादश ज्योतिर्लिंग में बाबा महाकाल सर्वोत्तम शिवलिंग माना गया है, कहते है 'आकआशए तारक लिंग पाताले हाटकेश्वरम भूलोके च महाकालो लिंगत्रय नमोस्तुते,, इसका अर्थ है,आकाश में तारक शिवलिंग पाताल में हाटकेश्वर शिवलिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर शिवलिंग है
भगवान शिव पूरी पृथ्वी पर अलग-अलग स्थानों में अनेक रूप व ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान है
*उज्जैन के धार्मिक प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर एवं दर्शनीय स्थल* आइए चलते हैं उज्जैन यहां आपको भक्ति की पवित्रता व शिप्रा नदी की शुद्धता आपके मन को ऐसी शक्ति प्रदान करेंगे की आप कुछ वक्त के लिए अपने दुख को भूल जाएंगे महाकाल राजा की नगरी में पहुंचते ही -
श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्रीनागचंदेश्वर, श्रीकालभैरव, श्रीमंगलनाथ, श्रीचिंतामणि गणेश, श्रीचारधाम, श्री कालियादेह, मां हरसिद्धि, मां गढ़कालिका, मां नगरकोट की रानी, मां भारत माता मंदिर उज्जैन नगरी में अनेकों प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर और शिप्रा नदी रामघाट-नरसिंहघाट व साधुसंतों एवं ऋषि मुनियों की तपस्या स्थल है





















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