कोटा विधानसभा क्षेत्र की आम जनता परेशान
बिलासपुर से सुरेंद्र मिश्रा
बिलासपुर -बेलगहना रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ियों के न रुकने से स्थानीय लोगों में रोष है समूचे छत्तीसगढ़ में आदिवासियों टीवी के गढ़ केन्दा 84 के रूप में जाना जाने वाला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जो कि वर्तमान समय में लगभग 100 ग्रामों से जुड़ा हुआ जिसमें वन ग्राम भी शामिल है ।एक ऐसा ही स्टेशन है जहां से सैकड़ों यात्री बिलासपुर शहर से आना-जाना करते हैं वर्तमान समय में यहां सभी गाड़ियों के ठहराव को बंद करके यहां की जीवन रेखा रेल को मानव समाप्त कर दिया गया है जीवन थम सा गया है बच्चे पढ़ने के लिए महाविद्यालय नहीं जा पा रहे हैं कामगार रोजगार के लिए शहर नहीं जा पा रहे हैं किसान रोज उगने वाली सब्जियों को गांव में ही बेचने को मजबूर हैं, ट्रेन के आवागमन के अभाव में कई छोटे किसानों ने सब्जियों की खेती को ही बंद कर दिया है। यहां तक की मृतकों को गंगा पहुंचाने के लिए भी यहां से सीधी ट्रेन एवं सभी स्टेशन होते हुए कोई ट्रेन नहीं है , पहले सारनाथ,अमरकंटक,रीवा एक्सप्रेस सभी मुख्य ट्रेनों के ठहराव का एक महत्वपूर्ण स्टेशन था। किंतु आज कोई भी ट्रेन खड़ी नहीं हो रही है लोग असहाय दुखी हैं कई बार संबंधित विषय पर नेताओं के द्वारा हड़ताल की गई किंतु उसका भी परिणाम सिफर ही निकला आखिर इतने लंबे समय तक ट्रेनों के ठहराव को रोकने के पीछे सरकार की मंशा क्या है यह बात समझ से परे है लोग अपने बीमारी के लिए एवं किसी भी तरह की समस्या के लिए एक बहुत बड़ी धनराशि को खर्च करके शहर जाते हैं अतः लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है दौड़ती हुई ट्रेन उनके ही स्टेशन से गुजर कर उन्हें चिढ़ाती है। लोग बेबस की तरह ठगा हुआ सा महसूस करते हैं,आने वाले विधानसभा चुनाव में निश्चित ही इस मुद्दे को कांग्रेस पार्टी भुलाने में लगेगी वही भारतीय जनता पार्टी को इस विधानसभा से काफी नुकसान की संभावना नजर आ रही है


















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