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Tuesday, January 30, 2024

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी करोड़ की सड़क, सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता का खामियाजा पंडरा पथरा से राम मंदिर कोटा के बीच बना मार्ग जिस पर खर्च 1203.62 लाख हुए थे

 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी करोड़ की सड़क, सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता का खामियाजा





पंडरा पथरा से राम मंदिर कोटा के बीच बना मार्ग जिस पर खर्च  1203.62 लाख हुए थे


सुरेंद्र मिश्रा जिला ब्यूरो बिलासपुर 

बिलासपुर...जहां निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के बीच मिलीभगत हो जाए वहां निर्माण कार्य का भगवान ही मालिक है। जीता-जागता उदाहरण है 16.7 किमी लंबा पंडरा पथरा से कोटा मार्ग।अब से दो साल पहले 1203.62 लाख की लागत से बना यह डामर रोड पहली बरसात में पानी में बह गया था। तब से अब तक इसकी दशा दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती चली गई। आज मौके पर रास्ता तो है मगर डामर रोड पूरी तरह से नदारद हो चुकी है।





 ग्रामीणों की मांग और जनप्रतिनिधियों के सतत प्रयासों से स्वीकृत यह रोड पीडब्लूडी द्वारा बनवाया गया था। रोड निर्माण का काम सबसे बड़े ठेकेदार के हाथों में था। रोड के जड़ से उखड़ जाने व आवागमन में असुविधा होने के कारण ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश है। विभाग और ठेकेदार को पानी पी-पीकर कोसने वाले ग्रामीणों की शिकायत शासन और प्रशासन के कारिंदों के मौन को लेकर भी है। शिकायतों के बाद भी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग पाई है।

                 गौरतलब है कि इस मार्ग में राम मंदिर से बेलगहना के मध्य नवागांव मे स्कूल भी है जहां बहुत दूर-दूर से छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं जिन्हें रास्ते पर बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ता है भारत के भविष्य स्कूल में बैठे धूल फांकते रहते हैं क्योंकि सड़क पर 24 घंटे धूल उड़ने की समस्या बनी रहती है।गौरतलब है कि इस गांव से ही भाजपा जिला महामंत्री मोहित जयसवाल बिलॉन्ग करते हैं जिन्होंने कुछ दिनों पूर्व कहा था कि हमारी सरकार आएगी तो अच्छी से अच्छी सड़क बनेंगे अथवा ठेकेदार के ऊपर कार्यवाही करवाएंगे अब जबकि उनकी सरकार आ चुकी है तो देखने वाली बात होगी कि सड़क कितने अच्छे तरीके से बन पाती है अथवा कोई कार्यवाही हो पाती है, बड़ी पार्टी के बड़े नेताओं के बड़े बोल तभी समझ में आएगा

जब कोई ठोस कार्रवाई होगी। 

टिकाऊपन पर उठे थे सवाल

गौरतलब है कि दो साल पहले जब यह रोड बनाया जा रहा था। इसके टिकाऊपन व काम की गुणवत्ता को लेकर सवालिया निशान लगने शुरु हो गए थे। विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रशासन तक का ध्यान घपलेबाजी की ओर आकृष्ट कराया जा रहा था। बावजूद इसके ठेकेदार के साथ मिलीभगत किए बैठे विभाग के अधिकारियों ने अपने कानों से रुई बाहर नहीं निकाली। नतीजा यह रहा कि निर्माण के बाद पहली बरसात की बौछारों ने गिट्टी और डामर के नसीब में वियोग लिख दिया। अब डामर और गिट्टी नाम की चीज मौके पर ढूंडे से मौजूद नहीं है।


 इस मार्ग के बनने से 108 और 112 जैसे वाहनों को अपने मौके पर पहुंचने के लिए बहुत ही कम समय लगता था कोटा से बेलगाना की दूरी महज 15 से 20 मिनट में तय कर ली जाती थी जो सड़क इतनी जर्जर है कि अब लगभग 45 मिनट से 1 घंटे के आसपास यहां पहुंचने में लगता है।

 5 साल की गारंटी दरकिनार, पेंचवर्क कराकर निपटाया

सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य के बाद उसके रख-रखाव की गारंटी 5 साल की होती है। गारंटी पीरियड में ठेकेदार निर्माण की सलामती को लेकर जिम्मेदार होता है। इसी गारंटी के आधार पर उसे भुगतान भी किया जाता है। पंडरा पथरा - राम मंदिर कोटा सडक के मामले में इस नियम का भी ध्यान नहीं रखा गया है। लिहाजा पहली बरसात में रोड उखड़ने के बाद ठेकेदार पेंचवर्क कराते हुए ना केवल जिम्मेदारी से मुक्त हो चुका है। बल्कि निर्माण के एवज में पूरा भुगतान भी हासिल कर चुका है। अब उसे या निर्माण कराने वालों को कोई सरोकार नहीं।

            कीचड़ भरे गड्डों में गुम हो गया रोड आलम यह है कि 16.7 किमी लंबे इस मार्ग पर वाहन लेकर गुजरना या पैदल चलना पूरी तरह से दुश्वार है। गंदे पानी और कीचड़ से भरे गड्डों में रोड का अस्तित्व गुम हो चुका है। छोटे-बड़े वाहन लेकर यहां से गुजरने में दो से एक घंटे का वक्त आराम से लग जाता है। इस रोड के लिए विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को जिम्मेदार बताते हैं। उनका कहना है कि बेहद घटिया तरीके से कराए गए निर्माण के इस काम पर प्रशासन समय रहते ध्यान दे लेता तो आज यह नौबत नहीं आती। उनका कहना है कि निर्माण की जांच कराई जानी चाहिए।

                      घटिया निर्माण के खिलाफ रहे ग्राम पंडरा पथरा के निवासी मनोज यादव का कहना है कि रोड निर्माण के समय आपत्तियों से विभाग व प्रशासन को तमाम बार अवगत कराया गया। बावजूद इसके ठेकेदार पर आंख मूंदकर भरोसा करने वाले जनप्रतिनिधि व अधिकारी खामोश बने रहे। घटिया ढंग से कराए गए निर्माण को लेकर जितनी भी शिकायतें उठाई गईं अनसुनी रहीं। यह सब मिलीभगत और कमीशनखोरी का प्रमाण हैं। उनके मुताबिक यदि इस रोड के निर्माण कार्य की जांच कराई जाए तो घोटाले का सच सामने आ सकता है। बशर्ते ठेकेदार को पूरा-पूरा संरक्षण देने वाले जांच से दूर रखे जाएं।

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