ग्राम सिर्रीखुर्द में बह रही श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान कथा, उमड़ रहे श्रद्धांलू,
गजेंद्र कुमार साहू- गरियाबंद -ग्राम सिर्रीखुर्द मे जन कल्याण सेवा मित्र मंडली द्वारा नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन किया गया है। पहले दिन बुधवार को कलश यात्रा निकाली गई। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर गंगा तट तक गई और वेदी पूजा की कलश यात्रा में शामिल होने के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी। पूर्वाह्न तक यह भीड़ बढ़ती गयी । कलशों में लाए गए जल से ही वेदमंत्रोच्चारण के साथ यज्ञशाला का शुद्धीकरण किया गया। बेदी पूजन कर कलश स्थापित किए गए।
दूसरे दिन गुरुवार को......
श्रीमद भागवत कथा में दूसरे दिन गुरुवार को कथावाचक पंडित कृष्णकांत शास्त्री जी ने सुखदेव जी के जन्म का वर्णन किया। शास्त्री जी ने बताया कि शुकदेव जी का जन्म भी एक रहस्यमय तरीके से हुआ था। उन्होंने कहा की जब भगवान शिव पार्वती को अमर होने की कथा सुनाने लगे तो पार्वती माता को हुंकारे भरते भरते उन्हें नींद आ गई। जब शिव अमरत्व की कथा पूरी हुई तो शिव जी ने देखा कि पार्वती माता तो सो रही है, फिर ये हुंकार कौन भर रहा था। उसके बाद भगवान शिव ने देखा की एक तोता वहां बैठा है, जो हुंकारे भर रहा रहा था। भगवान शिव को क्रोध आ गया और बोले की तूने मेरी बिना आज्ञा के अमर कथा का पान किया है। मैं तुझे जीवित नहीं छोडूंगा। भगवान शिव त्रिशूल लेकर उसके पीछे दौड़े। शुक यानि तोता अपनी जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा। वह वेदव्यास के आश्रम पहुंचा। वहां पर वेदव्यास की पत्नी बाहर कपड़े सूखा रही थीं। उन्हें जभाई आ गई तो तोता सूक्ष्म बनकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। भगवान शिव वहां आए और बोले कि मैं इस शुक को जीवित नहीं छोडूंगा। व्यास जी के पूछने पर सारी बात शिव ने बताई। व्यास जी बोले वह अब अमर हो चुका है ।
तीसरे दिन कपिल गीता ध्रुव चरित्र......
संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में ध्रुव चरित्र, कपिल भगवान तथा सती माता का वर्णन किया गया। मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथा वाचक ओमप्रकाश महाराज ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव भगवान ने साढ़े चार साल की उम्र में भगवान की भक्ति कर भगवान के साक्षात दर्शन कर अमर पद प्राप्त किया। भगवान कपिल ने अपनी अपनी मां को सांख्यिकी शास्त्र का उपदेश दिया था। सती माता का वर्णन करते हुए कहा कि सती माता अपने पति की अाज्ञा का उल्लंघन करते हुए अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होेने चली गई। जहां अपने पति का आसन नहीं देखकर अपना अपमान समझते हुए क्रोधित हो गई।
चौथे दिन प्रहलाद चरित्र व आजामिल कथा.
पंडित कृष्णकांत शास्त्री ने भक्त प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि प्रहलाद चरित्र पुत्र एवं पिता के संबंध को प्रदर्शित करता है
उन्होंने कहा कि यदि भक्त सच्चा हो तो विपरीत परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती। राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्यकश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रहलाद ने ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी। सच्चे अर्थों में कहा जाए तो प्रहलाद ने पुत्र होने का दायित्व भी निभाया। उन्होंने कहा कि पुत्र का यह सर्वोपरि दायित्व है कि यदि उसका पिता दुष्ट प्रवृत्ति का हो तो उसे भी सुमार्ग पर लाने के लिए सदैव प्रयास करने चाहिए, प्रहलाद ने बिना भय के हिरण्यकश्यप के यहां रहते हुए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया और पिता को भी उसकी ओर आने के लिए प्रेरित किया। लेकिन राक्षस प्रवृत्ति के होने के चलते हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद की बात को नहीं माना। ऐसे में भगवान नरसिंह द्वारा उसका संहार किया गया। उसके बाद भी प्रह्लाद ने अपने पुत्र धर्म का निर्वहन किया और अपने पिता की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
पांचवे दिन वामन अनवतार व श्रीकृष्ण जन्म, श्रीराम जन्म....
भागवतकथा में कथा वाचक प .कृष्णकांत शास्त्री ज ने भागवत कथा का महत्व बताते हुए प्रभु राम व कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। पाठक ने कहा कि कलयुग में भागवत की कथा सुनने से जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जन्म जन्मांतर के पापों का अंत भी होता है। राम जन्म के प्रसंग के दौरान श्रीराम विवाह प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मां सीता के विवाह के लिए हो रहे धनुष यज्ञ प्रकरण के दौरान जब कोई भी राजा धनुष नहीं तोड़ पाए तो जनक जी परेशान हो गए। इसके बाद गुरू विश्वामित्र जी बोले हे राम उठो और धनुष को तोड़कर जनक के दुख को दूर करो। गुरू की आज्ञा पाकर भगवान राम उठे और धनुष को तोड़ दिया। कथा में भक्तों को श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा भक्तों को श्रवण कराते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए और वासुदेव की बेड़ियां खुल गईं। वासुदेव भगवान ने श्रीकृष्ण इस संसार के पालनहार हैं। एक टोकरी में लेकर यमुना नदी को पार कर यशोदा मां और नंदलाल के पास छोड़ जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्टों का नाश करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया था। इस धरती को अधर्म से मुक्ति दिलाई।
छटवे दिन दही लूट, बाल चरित्र व रुखमनी विवाह....
दही लूट व रासलीला की अनुपम झांकी प्रस्तुत की गई। मनमोहक झांकियों और लीला से श्रद्धालु उत्साहित रहे। कथा वाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण भगवान पाप की मटकी को फोड़ते हुए पुण्य की मटकी की रक्षा करते हैं। भागवत, माता-पिता की सेवा, भगवान का दु:ख व सुख में स्मरण व मानव समाज से प्रेम भाव बनाने की सीख देता है।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। इस मौके पर रामजानकी मठ कांशी बनारस कन्वर्धा वाले पंडित कृष्णकांत शास्त्री ने संगीतमय कथा वाचन कर भगवान की बाल लीलाओं के चरित्र का वर्णन किया। श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, परंतु भगवान उसका वध कर देते हैं।
रुखमनी विवाह
उधव चरित्र, महारासलीला व रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया।
बॉक्स मे.....
वही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण मे यजमान के रूप मे हेमंत साहू लता साहू, दाऊलाल साहू कमला साहू, पुनीत राम साहू कला बाई साहू कथा श्रवण कर रहे है साथ ही साथ कथा आयोजन जन कल्याण सेवा मित्र मंडली व समस्त ग्राम सिर्रीखुर्द ने समस्त कथा श्रोता गणों को बड़ी संख्या में पहुंचकर ज्ञान गंगा में डुबकी लगाने अपील की है.



















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