घर की जिम्मेदारी दुकान की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते उपासना यादव को मिला गोल्ड मेडल।
घर की जिम्मेदारी एवम बीमार पिता के उवचार के बीच की पढ़ाई।
पिथौरा, नगर के अत्यंत निर्धन परिवार में जन्मी एक बेटी ने अपने परिवार का गुजारा करने व्यापार करते हुए पढ़ाई की और अब उसका पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से छत्तीसगढ़ी साहित्य में गोल्ड मेडल हेतु चयन किया गया है।
उपासना यादव को आज भी नगर के लोग कम ही जानते है।क्योंकि इसने कभी अपनी शिक्षा का कोई प्रचार प्रसार नही किया और न ही कभी इस बेटी की ओर किसी का ध्यान ही गया।रविवार को पंडित रविशंकर यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ का एम ए अंतिम का रिजल्ट आया।इसमें पिथौरा के एक फुटपाथ पर जुता चप्पल बेचने एवम भवन ढलाई हेतु आवश्यक सेंट्रिंग मटेरियल किराए पर देने का व्यवसाय करने वाली उपासना यादव का नाम गोल्ड मेडलिस्ट में दर्शाया गया था।स्वयं को गोल्ड मेडल की खबर मिलते ही उपासना खुशी से अपनो के सामने इजहार करने दौड़ पड़ी।इस प्रतिनिधि को ज़ब यह पता चला तब हमारे प्रतिनिधि रजिंदर खनूजा ने उपासना से चर्चा की।
चर्चा में उपासना यादव एवम उसके आसपड़ोस वालो ने जो कहानी बताई वो किसी फिल्म की स्टोरी से कम नही थी।उन्होंने बताया कि वे अपने पिता की दूसरी संतान है उनसे बड़ा एक भाई और छोटी एक बहन भी है।3 वर्ष पूर्ण होते ही उसके पिता सुरेश यादव ने उसे पिथौरा के सरस्वती शिशु मंदिर में भर्ती कराया।यही से उसे संस्कार की शिक्षा के साथ पढ़ाई कर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।इसके बाद शासकीय कन्या शाला में उसने 12वी तक कि पढ़ाई की।घर मे कोई पढा लिखा नही था इसके बावजूद वह प्रत्येक परीक्षा में स्कूल में प्रथम स्थान पर रहती थी।इसके बावजूद उसे कभी भी वह सम्मान नही मिला जो अन्य टॉपर बच्चों को मिलता था।इसके बाद भी कभी वह निराश नही हुई और पढ़ाई का क्रम जारी रखा।पिथौरा के सरकारी कॉलेज से ही उसने बीए तक पढ़ाई की यहां भी वह 76 प्रतिशत अंक लेकर टॉपर थी।इसके बाद आर्थिक स्थिति न होने के कारण उसने भासा साहित्य में सी वी रमन यूनिवर्सिटी से एम ए किया।एम ए करने के बाद उपासना ने cg psc की परीक्षा दी परन्तु कुछ ही अंकों से पीछे रह गयी लिहाजा अपनी पढ़ाई का क्रम जारी रखने उसने प रविशंकर यूनिवर्सिटी में एम ए के लिए प्रवेश परीक्षा दी।इस परीक्षा में पहली बार मे ही उसे सफलता मिली और उसका चयन छत्तीसगढ़ी साहित्य में एम ए के लिए हो गया।नियमित एम ए करते उसे अपने घर को चलाने का दबाव भी था परन्तु पिता सुरेश यादव की हिम्मत ने उसे रविशंकर विश्वविद्यालय में ही एम ए करने मजबूर कर दिया।जिसके कारण आज वह एम ए अंतिम का परिणाम आने के बाद गोल्ड मेडलिस्ट हो गयी है।
भगवान ने उसकी बहुत परीक्षा ली
अपनी पढ़ाई के दौरान उसे अनेक परीक्षाओं का सामना करना पड़ा।पहले बीए तक कि पढ़ाई उसने घर खर्च हेतु फुटपाथ में जूता चप्पल बेच कर की।दुकान में ही समय निकाल कर वह हमेशा पढती रहती थी।इसके बाद रायपुर रविशंकर यूनिवर्सिटी में उसका चयन होंते ही पिता सुरेश यादव को लकवा मार गया जिससे उसकी पढ़ाई पर सीधा असर होने लगा था।इसके बाद उसने लकवा के इलाज के बारे में पता लगाया तब उसे राजस्थान में इसके अच्छे उपचार की जानकारी मिली।जहां उपासना स्वयम पिता को लेकर उपचार हेतु पहुच गयी।उपचार के बाद वापस आने पर उसने रायपुर आकर एम ए की तैयारी की और इस एम ए में पुनः एक बार पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप किया और इस परीक्षा में 74 फीसदी अंक लेकर टॉप किया जिसके कारण उन्हें गोल्ड मेडल के लिए चयन किया गया है।
पीएससी करना चाहती हु--उपासना
गोल्ड मेडलिस्ट उपासना ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उनके अपने लोगो ने ही उन्हें लगातार लड़की है बाहर मत पढ़ो, कहते हुए उनके बारे में अनर्गल बाते भी करते रहते।लोगो की बातों से वे थोड़ी देर हताश रहती थी परन्तु इसके बाद दुगुने उत्साह से पढ़ाई में जुटी रही और साथ पूरा घर चलाने की जिम्मेदारी एवम पापा के उपचार एवम उन्हें प्रतिदिन उपचार हेतु लेजाने की जिम्मेदारी का भी निर्वहन करती रही।पीएससी की तैयारी भी उसने इंटरनेट पर मौजूद साहित्य मोबाइल से सर्च कर पढ़ती रहती थी।लिहाजा पिछली पीएससी परीक्षा में वह सफलता से मात्र 4 अंक पीछे रह गयी थी।बहरहाल आर्थिक कारणों से अब भी यह बेटी अपने व्यवसाय मे ही बैठ कर पीएससी की तैयारी में जुटी है।उसे भरोसा है कि उसकी मेहनत और माता पिता के आशीर्वाद के कारण वह एक दिन जरूर अपने मकसद में कामयाब होंगी, और सपनों को पूरा कर सकेगी।



















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