राधा कृष्णा मंदिर प्रांगण में चल रही संगीतमय भागवत कथा
रंजीत बंजारे CNI न्यूज बेमेतरा श्रीमद् भागवत कथा में लिखें मंत्र और श्लोक केवल भगवान की आराधना और उनके चरित्र का वर्णन ही नहीं है।
श्रीमद्भागवत की कथा में वह सारे तत्व हैं जिनके माध्यम से जीव अपना तो कल्याण कर ही सकता है साथ में अपने से जुड़े हुए लोगों का भी कल्याण होता है।
जीवन में व्यक्ति को अवश्य ही भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बिना आमंत्रण के भी अगर कहीं भागवत कथा हो रही है तो वहां अवश्य जाना चाहिए। इससे जीव का कल्याण ही होता है। उक्त बातें श्री राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण नगर मारो में चल रही संगीतमय भागवता कथा में आचार्य श्री कांत पाठक महाराज लोरमी वाले ने ब्यास पीठ से कहीं।
संतों का परिचय उनका भेष नहीं गुण होता है: आचार्य ने संतो के संबंध में कहा है कि संत का परिचय संत का भेष नहीं होता है। उनका तो मुख्य भेष उनका गुण होता है। आज के समय में कई बहुरूपिया संत भी चोला धारण कर विचरण कर रहे हैं।
लेकिन आचार्य ने संत के 6 गुण बताएं। जिसमें उन्होंने कहा कि संत में सहनशीलता, करुणा, सबको अपना मानना, किसी से शत्रुता ना रखना, निष्कामता एवं परोपकारी होना ही संत की असली पहचान है।
आचार्य श्री ने कहा जब भी आप किसी संत या महात्मा से मिले तो इन 6 गुणों के माध्यम से उसकी पहचान कर सकते हैं। संत की पहचान होना आवश्यक है क्योंकि वही तो आपका मार्गदर्शन करते है। आचार्य पाठक जी ने कहा कि कई बार कहा जाता है कि " पानी पियो छान के, संत करो जांच के" क्योंकि सच्चा संत ही आपको सदमार्ग और ईश्वर से प्रेम करना सिखा सकता है।
माता पिता को करते थे श्री कृष्ण प्रणाम आचार्य श्री ने भागवत कथा में प्रथम दिवस व्यास शुकदेव जी का परिचय कराया साथ ही जब महराज को ऋषि का श्राप लगा तो गंगा तट पर भगवान की प्रेरणा से शुकदेव जी आगमन हुआ और श्रीमद्भागवत की अमृतमय कथा सुनाए।



















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