भागवत कथा सुनने से दूर हो जाते हैं जीवन के तमाम दुख-दर्द - अनिरुद्धाचार्य जी महाराज
वृंदावन धाम में कथावाचन करते पं. अनिरुद्धाचार्य जी महाराज।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि मानव जीवन में भागवत कथा का सर्वाधिक महत्व है।
उन्होंने मुनि शुकदेव और राजा परीक्षित के बीच हुए संवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने श्रोताओं को अपनी इंद्रियों को वश में रखने की सीख भी दी।
वृंदावन। वृंदावन धाम में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को पहले दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान की कथाएं नित्य सुनना चाहिए। भगवान की कथा सुनने से जीवन के दुख दूर होते हैं। इंद्रियों को वश में रखना चाहिए। कलयुग के स्थान हैं जुआ, शराब, चरित्रहीनता, मांस, बेईमानी से कमाया हुआ धन। इनसे दूर रहना चाहिए।
सुनाया शुकदेव-परीक्षित प्रसंग
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से प्राणी न केवल मोक्ष को प्राप्त करता है, वरन् मृत्यु के भय से भी निर्भय हो जाता है। यही कारण है कि मानव जीवन में भागवत कथा का सर्वाधिक महत्व है। महाराज ने आचार्य शुकदेव और राजा परीक्षित के बीच हुए संवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित कोतक्षक नाग द्वारा डसने से होने वाली मृत्यु के बारे में जानकारी मिली तो वे शुकदेव मुनि की शरण में गए और उनसे अपनी मुक्ति का मार्ग पूछा। जब शुकदेव जी ने बताया कि सात दिन के भीतर राजा की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से होगी। श्रीमद्भागवत श्रवण से मृत्यु का यह भय मिट जाएगा।
ऐसे दूर हुआ मृत्यु का भय
इस पर राजा ने उन्हीं से विनती की और सात दिन तक भागवत कथा का श्रवण किया। हुआ भी यही कि कथा के अंतिम अध्याय तक पहुंचते-पहुंचते राजा के मन से मौत का भय निकल गया। अंत में राजा ने निर्भीक होकर कहा कि मैं कभी नहीं मरूंगा। मरेगा तो केवल मेरा शरीर, आत्मा तो अमर है। अनिरुद्धाचार्य जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बरसाने की राजकुमारी राधाजी के जीवनवृत्त और उनके द्वारा की गई श्रीकृष्ण की प्रेममयी भक्ति के बारे में भी विस्तार से समझाया।
सी एन आई न्यूज के लिये संजू महाजन की रिपोर्ट।


















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