दर्जनों क्लीनिक बगैर लाइसेंस और बिना परमिशन के संचालित
तरह-तरह के फर्जी डिग्री धारी डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे
सुरेंद्र मिश्रा जिला ब्यूरो बिलासपुर
कोटा विकासखंड के बेलगहना तहसील छेत्र में इन दिनों दर्जनों क्लीनिक बगैर लाइसेंस और बिना परमिशन के संचालित किए जा रहे है। इसके बाद भी प्रशासन और जिम्मेदार मेडिकल महकमा फर्जी चिकित्सकों पर कार्रवाई से बच रहा है।
बेलगहना सहित टेंगनमाडा केंदा खोंगसरा,कोंचरा , मझवानी,कुरदार, बहेरामुड़ा,आदि क्षेत्रों में सैकड़ों झोलाछाप चिकित्सक बिना अनुमति अवैध क्लीनिक का संचालन कर रहे है।
नर्सिंग एक्ट को ठेंगा दिखाकर कथित डॉक्टर अपनी दुकान चला रहे हैं। वे अपनी कमाई के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमे सहित प्रशासन को अवैध क्लीनिक संचालन की जानकारी तो है, लेकिन वे कार्रवाई से बचते हैं।
विकासखंड के हर गांव में फर्जी डॉक्टर अपनी क्लीनिक खुलेआम चला रहे है। शहरी क्षेत्रों में भी बिना लाइसेंस के कई क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। यहां तक की फर्जी डिग्री या बिना डिग्री के आधार पर भी लोगों का उपचार किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को जांच करने तक की फुर्सत नहीं है।
लाखों की दवाई बेच रहे होलसेलर
सक्रिय कथित डॉक्टर न केवल मरीजों का उपचार करते हैं,बल्कि दवाइयां भी खुद ही देते हैं। इसके लिए बाकायदा बेलगहना, खोंगसरा,केंदा,स्थित दवाई के थोक विक्रेताओं से लाखों रुपयों की दवाई की खरीदी हो रही है। प्रशासन को इस बात बात की भी जांच करना चाहिए कि लाखों की दवाइयां झोलाछाप चिकित्सकों सहित दूसरी पेथी में प्रेक्टिस करने वालों को बेचने की अनुमति दवाई विक्रेताओं को कौन दे रहा है। क्या शासन की नियमावली में इस तरह की बिक्री के लिए कोई वैधानिक व्यवस्था है। इस तथ्य की भी जांच होना चाहिए।
इंजेक्शन तक देते हैं फर्जी डॉक्टर
अवैध रूप से संचालित किए जाने वाले अस्पतालों में इंजेक्शन और सलाइन लगाने के साथ ही गंभीर बीमारियों तक का इलाज किया जा रहा है।
मेडिकल माफिया इतना सक्रिय
मेडिकल माफिया इतना सक्रिय है कि दवाइयों मरीजों को देते समय परिणामों की चिंता नहीं की जा रही है। क्षेत्र में इन दिनों फर्जी डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है चिकित्सक कर रहे एलोपेथिक इलाज
बेलगहना तहसील के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कई चिकित्सक ऐसे है जिन्होंने पढ़ाई तो बीएचएमएस या अन्य पेथी में की है, लेकिन वे मरीजों का इलाज एलोपेथिक दवाइयों से कर रहे है। इनके पास मेडिकल की डिग्री तो हो सकती है, लेकिन इनके द्वारा अन्य पेथी में इलाज किया जा रहा है। नगर के कई क्षेत्रों में खुले क्लिनिक हर छोटी और बड़ी बमारी का इलाज कर रहे हैं।कुछ चिकित्सक तो अपने यहां लोगों को भर्ती कर इलाज भी कर रहे है। सूत्रों की माने तो वर्तमान में 20 से अधिक क्लीनिक संचालित हो रहे है,लेकिन अधिकतर ने जिला प्रशासन सहित अन्य वैधानिक अनुमति देने वाली संस्थाओं से अनुमति नहीं ली है,लेकिन सिविल अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते




















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