रतनपुर सावन महीने का प्रथम सोमवार को बूढ़ा महादेव में भक्तों की लगी भीड़
रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्ट
रतनपुर बुढा महादेव मंदिर में सोमवार को भक्त जलाअभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं यह मंदिर बहुत ही पुरानी और ऐतिहासिक मंदिर है इस मंदिर को वृद्धेश्वर नाथ मंदिर के रूप में भी लोग जानते हैं यहां की शिवलिंग में जितना भी जल चढ़ाया जाए वह अपने अंदर समाहित कर लेता है और यह जल यथास्थिति ही रहता है और इतना अर्पित किया जल कहां जाता है यह रहस्य आज भी बना हुआ है।
इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है राजा रत्न देव के समय से इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था यहां के शिवलिंग के बारे में किवदंती है कि यह जगह कभी जंगल की तरह था जहां पर बांस की झाड़ियां थी और यहां पर चरवाहा बहुत सारी गाय को जब चराने के लिए लाता था तो उसमें से एक गाय बांस के झुंझ में जाकर अपने थन से इस स्थान पर अपना दूध छरण कर देती थी एक रोज चरवाहे ने इस राज् को जानना चाहा और जानने के बाद यह बात राजा को बताया,
और उसी रात राजा को स्वप्न में भी यहां शिवलिंग होने का स्वप्न आया फिर क्या था राजा ने स्वयं जाकर वहां पर गाय को दूध छरण करते हुए देखा उसके बाद राजा ने वहां मंदिर का निर्माण करवाया तब से लेकर आज तक यहां पर जलाअभिषेक, दूधाअभिषेक कर भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर में पहुंचते हैं यहां पर कांवड़ यात्रियों का भी जत्था देखने को मिलता है




















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