रिपोर्टर - दिलीप सोनवानी की रिपोर्ट।
बेलगहना बिलासपुर।
छत्तीसगढ में स्कूली बच्चों को एक शिक्षक ने कलम पुस्तक कापी की जगह झाडू पोछा पानी भरने के लिये शिक्षा दे रहे है।
प्राथमिक शाला नवाडीह में स्कूल में स्विपर नही,
मासूम स्कूली बच्चों को स्कूल के शिक्षक करा रहा है - झाडू पोझा, पानी भरने का काम।
बिलासपुर जिले के विकास खण्ड कोटा के प्राथमिक शाला नवाडीह , सन्कुल बानाबेल का पुरा मामला है
=,भविष्य के साथ खिलवाड़ ,=
छत्तीसगढ़ बिलासपुर, जिले के विकासखंड कोटा के प्राथमिक शाला का मामला सामने आया है जहां पर देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जिस समय में बच्चों को प्रार्थना करके स्कूल में पढ़ाई करना चाहिए उस समय बच्चे स्कूल के कामकाज कर रहे हैं कचरा साफ कर रहे हैं झाड़ू लगा रहे हैं पानी भर रहे हैं आखिर ऐसा क्यों बच्चे अपने निर्धारित समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं परंतु शिक्षक आधा घंटा लेट आखिर ऐसा क्यों सवाल बना हुआ है,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,, एक माह से नहीं आ रहा स्वीपर,,,,,,,,,
प्राथमिक शाला नवाडीह में एक माह से नहीं आ रहा है स्वीपर रोजाना बच्चों को लगानी पड़ रही है क्लास में झाड़ू फेंकना पड़ रहा है कचरा पीने के लिए लाना पड़ रहा है पानी आखिर ऐसा क्यों अगर बच्चे स्कूल का सारा काम कर सकते हैं तो फिर शिक्षक क्यों नहीं कर सकते सफाई कर्मचारी नहीं आ रहा है तो इसकी जिम्मेदारी प्रधान पाठक की होती है परंतु बड़े शर्म की बात है कि प्रधान पाठक श्री मनमोहन सिंह पैकर खुद सामने होकर के बच्चों से कार्य करवा रहे हैं स्कूल में शिक्षक समय पर नहीं पहुंच रहे हैं स्कूल की प्रार्थना का समय 10:00 बजे से है परंतु शिक्षक 10:30 आते हैं ऐसे में किस तरह से बच्चों की पढ़ाई हो रही है यहां तो जग जाहिर समझ आ रहा है वही ग्रामीणों के द्वारा संकुल प्रभारी चंद्रशेखर पैकर से सवाल किया गया प्राथमिक शाला नवाडीह में सफाई कर्मी नहीं और स्कूल मे बच्चों से साफ सफाई और झाड़ू पोछा पानी भरवारा जा रहा है उन्होंने कहा कि मैं अपने उच्च अधिकारियों को मौखिक अवगत करा दिया हूं ग्रामीणों ने संकुल बना बेल के हाई स्कूल के प्राचार्य प्रेम सिंह राजपूत जी से पूछा गया कि आप अपने संकुल क्षेत्र के स्कूल के दौरा करते हो या नहीं तो उनका जवाब आया कि मेरे द्वारा सप्ताह में तीन दिन दौरा किया जाता है जब ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल में स्वीपर नहीं है बच्चों से स्कूल के काम कराया जा रहा है तो उनका कहना है कि स्कूल में स्वीपर है जबकि सच्चाई यहां है कि एक माह से सफाई कर्मचारी नहीं आ रहा है ऐसे में यहां कैसे संभव है कि संकुल प्रभारी और हाई स्कूल के प्राचार्य प्राथमिक शाला नवाडीह में दौरा करते होंगे ऐसे बहुत सारे सवाल शासकीय स्कूल में बने हुए हैं आखिर जिम्मेदारी किसकी क्या शासन प्रशासन की लापरवाही की वजह से ऐसे शिक्षक मात्र अपनी पेमेंट के लिए स्कूल जा रहे हैं और बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की बजाय कामकाज में उनका ज्ञान बांट रहे हैं सवाल बना हुआ है,,,,,,,,,,,,
,,,,, क्या अपने बच्चों को भी स्कूल में काम करते देखा शिक्षक खुश होंगे,,,,,,,,,,,
वैसे तो जितने भी गवर्नमेंट के अप्लाई है अपने बच्चों को गवर्नमेंट स्कूल के बजाए प्राइवेट स्कूल में पढ़ना पसंद करते हैं 100 में से 2% ही लोग होंगे जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं अगर इसी तरह का कार्य उनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में करते तो शायद यह शिक्षक स्प्राइट स्कूल को बंद करने के लिए उन पर दबाव बनाते उनकी शिकायत करते हैं प्राइवेट स्कूल पर इल्जाम लगाते कि जब हम फीस दे रहे हैं तो हमारे बच्चों से इस तरह का कार्य क्यों कराया जा रहा है आखिर यह कैसा नियम है जिस तरह से प्राइवेट स्कूल में फीस के माध्यम से राशि ली जाती है इस तरह से सरकारी स्कूल चलाने के लिए भी देश के नागरिकों से टैक्स लिया जाता है बच्चों की पढ़ाई के लिए जो सामग्री आती है उसमें सरकार टैक्स लगाती है बच्चा अपने पैसे से पढ़ाई करता है फिर ऐसा भेदभाव सरकारी और प्राइवेट स्कूल में क्यों सवाल बना हुआ है क्या खबर शिक्षा विभाग तक पहुंचेगी अगर शिक्षा विभाग तक हमारी खबर पहुंच जाती है तो क्या शिक्षा विभाग इसमें कोई एक्शन लेगा क्या लापरवाह शिक्षकों को शिक्षा विभाग सस्पेंड करेगा क्या बच्चों से अब सरकारी स्कूल में काम नहीं करवाया जाएगा या फिर इसी तरह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाएगा यहां तो आने वाला समय बताएगा सवाल बना हुआ है,, ,,,,,





















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