जोता मे भब्य कलश यात्रा प्रारम्भ हुई शिव महापुराण पुराण कथा..
सबका कल्याण करते है भगवान शिव - - - - . आचार्य नंदकुमार शर्मा
अजय नेताम रिपोर्टर / ----------------------------------------
तिल्दा नेवरा ... समीपस्थ ग्राम जोता मे 22 फरवरी से 26 फरवरी तक पंच दिवसीय श्री शिव महापुराण का आयोजन समस्त ग्रामवासी जोता द्वारा किया गया है. कथा के प्रथम दिवस शनिवार को भब्य कलश यात्रा निकाली गयी. जिसमें नव निर्वाचित ग्राम सरपंच देवेन्द्र वर्मा जी, पूर्व सरपंच श्री मति अमिता रमेश गेंदरे जी, सभी पंच गण सहित समस्त ग्रामवासी शामिल हुए..
कथा वाचक आचार्य पंडित नंदकुमार शर्मा जी निनवा वाले ने बड़े ही सरल शब्दों के साथ शिव महापुराण कथा को श्रद्धालुओं को श्रवण कराए. आचार्य जी ने कहा भगवान शिव की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है क्योंकि भगवान शिव कल्याण एवं सुख के मूल स्त्रोत हैं। आचार्य जी शंकर शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि "शं" का अर्थ - कल्याण और" कर" का अर्थ है करने वाला. वे संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर, समस्त भूतों के अधीश्वर, ब्रह्मवेद के अधिपति तथा साक्षात परमात्मा हैं।जो प्राणी भगवान शिव की शरण में चला जाता है, चाहे वह कैसा भी हो, भगवान शिव उसको अपनाकर उसका कल्याण कर देते हैं। भगवान भोलेनाथ की कथा में गोता लगाने से मानव को प्रभु की प्राप्ति होती है लेकिन कथा सुनने व उसमें उतरने में अंतर होता है। सुनना तो सहज है लेकिन इसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकता हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए हलाहल विष का पान कर लिया और अमृत देवताओं को देकर सारी मानव जाती के सामने एक सन्देश रखा कि यदि महान बनना चाहते है तो त्याग की भावना से पोषित होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब तक मानव अज्ञानता के गहन अंधकार से त्रस्त रहेगा तब तक उसका सर्वागीण विकास संभव नहीं हैं। जिस प्रकार बाहर के प्रकाश से बाह्य अंधकार दूर होता है उसी प्रकार आंतरिक ज्ञान प्रकाश से आंतरिक अज्ञान तमस नष्ट होता है। ज्ञान की प्राप्ति किसी पूर्ण गुरू की शरण में जाकर ही होगी, जो मानव के भीतर उस ईश्वरीय प्रकाश को प्रकट कर देते हैं। भगवान शिव के पूजन की विधि सबसे आसान और सहज है। सृष्टि के कल्याणकारी देव महादेव शिव शंकर ही ऐसे देव हैं जो मात्र एक लोटा जल श्रद्धा भाव से ग्रहण कर ही मानव के जीवन को सरल बना देते हैं। शिव हम सभी के आसपास ही विराजमान रहते हैं। न जाने किस रूप में वे अपने भक्तों को दर्शन दे जाएं। आचार्य जी शिव पुराण महात्म्य के अन्तर्गत बिन्दुग ब्राह्मण और चंचुला की कथा सुनाए. उन्होंने बताया कि चंचुला जो कि पाप कर्मों से युक्त थी शिव पुराण की कथा सुनते सुनते अपने प्राण त्याग दी. जिसके बाद चंचुला को शिव लोक के प्राप्ति हो गई. उन्होंने कहा कि जो भी जीव मरण काल मे शिव की कथा सुनता है या शिव जी के नामों का स्मरण करता वह जी सारे पापो से मुक्त होकर शिव लोक को प्राप्त कर लेता है.



















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