कुंजराम यादव बसना रिपोर्टर
मोहगांव में 1936 से चल रही श्रीरामलीला की परंपरा, 11 दिवसीय आयोजन बना श्रद्धा का केंद्र
बसना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भगत देवरी के पास ग्राम मोहगांव में वर्ष 1936 से निरंतर श्रीराम लीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। यह आयोजन श्रीराम नवमी से शुरू होकर आगामी ग्यारह दिनों तक चलता है, जिसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन किया जाता है।
हर दिन रामकथा के प्रमुख प्रसंगों का मंचन
ग्यारह दिवसीय श्रीराम लीला मंचन में रामायण के विभिन्न कांडों का मंचन क्रमशः इस प्रकार होता है:
1. प्रथम दिवस – श्रीराम जन्म (आद्य कांड)
2. द्वितीय दिवस – यज्ञ रक्षा (आद्य कांड)
3. तृतीय दिवस – श्रीराम विवाह (आद्य कांड)
4. चतुर्थ दिवस – श्रीराम वनवास (अयोध्या कांड)
5. पंचम दिवस – भरत मिलन (अयोध्या कांड)
6. षष्ठ दिवस – सीता हरण वध (अरण्य कांड)
7. सप्तम दिवस –बाली बध (किष्किंधा कांड)
8. अष्टम दिवस – सीता की खोज (सुंदर कांड)
9. नवम दिवस – कुंभकरण वध (लंका कांड)
10. दशम दिवस – इंद्रजीत वध (लंका कांड)
11. एकादश दिवस – रावण वध एवं श्रीराम का राज्याभिषेक (लंका कांड)
सन् 2017 में हुआ गांव के बीच गली में श्रीराम-जानकी मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
ग्रामवासियों की सामूहिक श्रद्धा और सहयोग का अनूठा उदाहरण 2017 में देखने को मिला था, जब श्रीराम-जानकी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस मंदिर निर्माण में गांव के सभी कर्मचारियों ने अपने एक माह का वेतन समर्पित किया, वहीं किसानों ने एक-एक एकड़ खेती-भूमि से ₹1400-1400 का सहयोग देकर मंदिर निर्माण में भागीदारी निभाई।
ग्यारह दिन का सात्विक जीवनचर्या
श्रीराम नवमी से शुरू होने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान गांववासी पूरी श्रद्धा के साथ सात्विक जीवन यापन करते हैं। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बन चुका है। आपको बता दें कि ग्राम मोहगांव की यह परंपरा, अगली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है।


















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