गाय को भारत में माता का दर्जा दिया गया है। गौमाता के दूध को अमृत माना जाता है।
सी एन आइ न्यूज़ -पुरुषोत्तम जोशी । भारत में गायों को हमेशा से ही पवित्र दर्जा प्राप्त रहा है, जो शक्ति, प्रचुरता और पोषण का प्रतीक है ।आयुर्वेद के अनुसार भारतीय देसी गाय के दूध में प्रचुर मात्रा में जीवन देने वाले प्रोटीन होते हैं। अपनी शुद्धता के लिए यह दूध भारतीय लोगों का पारंपरिक आहार है।देशी गाय का दूध, घी,दही,पनीर सिर्फ पौष्टिक आहार ही नहीं है,ये बच्चों, बुजुर्गों, युवा सभी के लिए जीवन को बेहतर बनाने वाला आहार है। देशी गाय के घी से अनेक रोगों से राहत मिलती है।
पुरानी हिचकी
गाय का घी और सेंधा नमक मिलाकर सीने पर मालिश करने से पुरानी हिचकी बंद हो जाती है।
हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
वाइन का नशा
गाय के दो चम्मच घी में चीनी मिलाकर पीने से वाइन का नशा कम हो जाता है।
आंखों की ज्योति
गाय के घी में मिश्री मिलाकर सेवन करने से आंखों की ज्योति बढ़ जाती है।
लकवा का रोग
गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है।
वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है ।
यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
मानसिक शांति ,याददाश्त
गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
केंसर
गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
एसिडिटी व कब्ज
गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की कम हो जाती है।
शराब, भांग व गांजे का नशा कम करता है ।
(20-25 ग्राम) घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांजे का नशा कम हो जाता है।


















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