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Saturday, May 10, 2025

समाज में संयम , शांति और सद्भावना बनायें रखें - महामहिम राज्यपाल

 समाज में संयम , शांति और सद्भावना बनायें रखें - महामहिम राज्यपाल 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


रायपुर - वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति केवल सीमाओं पर युद्ध की चुनौती नहीं है बल्कि यह हमारे समाज की एकजुटता , हमारी संस्कृति की सहिष्णुता और हमारे नागरिकों की जागरूकता की परीक्षा भी है। हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज में संयम , शांति और सद्भाव को बनाये रखें। 

                               


                     उक्त बातें वर्तमान में चल रहे तनावपूर्ण परिस्थिति में सभी धर्मो , समाजों एवं सम्प्रदायों के बीच शांति , सौहार्द एवं एकजुटता के उद्देश्य से आज राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित सर्वधर्म सभा की अध्यक्षता करते हुये महामहिम राज्यपाल रमेन डेका ने अपने उद्बोधन में कही। उन्होंने कहा कि जब हमारा राष्ट्र संघर्ष से गुजर रहा हो तो केवल सीमाओं पर तैनात हमारे सैनिक ही नहीं बल्कि देश के हर नागरिक की चेतना , एकता और संकल्प ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि सदियों से भारत एक ऐसा देश रहा है जिसने विविधताओं को अपनाया है और जहां पूजा की विधियां भले ही भिन्न हो पर मानवता की मूल भावना सभी में एक समान है। जब-जब देश पर संकट आया है हर धर्म , हर जाति , हर वर्ग के लोग कंधे से कंधे मिलाकर खड़े हुये हैं। वर्ष 1965 और 1971 के युद्ध हो या वर्ष 1999 का कारगिल का संघर्ष हर बार हमारे देश ने यह सिद्ध किया है कि हम किसी धर्म , सम्प्रदाय या भाषा के नाम पर विभाजित नही हो सकते। हमारे देश में हिंदू , मुस्लिम , सिक्ख , ईसाई , जैन , बौद्ध और अन्य सभी धर्मो के लोग मिलजुल कर रहते है जिसमें छत्तीसगढ़ भी इस सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण है। इस दौरान महामहिम डेका ने छत्तीसगढ़ की जनता से अपील की कि वे एकजुट रहने के साथ ही शांति और सौहार्द बनायें रखें। अभी यह सोचना है कि देश व समाज को हम क्या दे सकते हैं ? हमें एकजुट होकर  देश के लिये खड़ा होना है।


सत्य , अहिंसा और शांति का पुजारी है भारत - सीएम साय 


इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सर्व धर्म सभा में अपने सम्बोधन में कहा कि भारत देश सत्य , अहिंसा और शांति का पुजारी है। आज के इस बैठक में सभी धर्म के प्रतिनिधियों ने एकता का संकल्प दोहराया है। इस घड़ी में हम सभी को यह दिखाना है कि हम एकजुट है और देश के सैनिकों के अदम्य साहस को हम प्रणाम करते है। हमारी सेना के जवानों ने आंतकियों को मुंह तोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमें बहुत सचेत रहने की जरूरत है , ऐसे समय में असामाजिक तत्व भी लाभ उठाने का प्रयास करते है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया में आ रही भ्रामक सूचनाओं से भी जनमानस को सतर्क रहने को कहा। 


राष्ट्र के लिये जीना और मरना ही सबसे बड़ा धर्म है - दिवाकर तिवारी 


इस धर्म सभा में ब्राह्मण समाज के तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुये दिवाकर तिवारी ने कहा कि आज हम सब यहां इसलिये एकत्र हुये हैं , क्योकि देश युद्ध की विभीषका के कगार पर खड़ा है। इस परिस्थिति मे हमारा धर्म है कि हम एकजूट रहें। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुये कहा कि धर्म जोड़ता है - तोड़ता नही। और जो तोड़ता है वह धर्म नही अधर्म है। अधर्म का विरोध हर भारतीय करे और इसके लिये व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़े। राष्ट्र के लिये जीना और राष्ट्र के लिये मरना ही सबसे बड़ा धर्म है। इसके अलावा इस सर्व धर्म सभा में विभिन्न धार्मिैक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुये देश की एकता और अखण्डता पर जोर दिया। शांति एवं सद्भाव बनाये रखने के लिये एक - दूसरे के धर्म का सम्मान करने तथा शासन एवं प्रशासन के हर निर्देशों का पालन करने की बात कही। इस सर्वधर्म सभा में जैन समाज के चंद्रेश शाह , शदाणी दरबार के युधिष्ठिर महाराज , ब्रम्हाकुमारी शांति सरोवर की सविता बहन , सिक्ख समाज के सरदार अमरिक सिंह , बोहरा समाज के फिरोज गांधी , ब्राम्हण समाज के दिवाकर तिवारी , बौद्ध समाज के डॉ. जीवक , रामकृष्ण मिशन के किशोर महाराज , भारत सेवा संघ के स्वामी शिवरूपानंद महाराज , बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ की सुश्री सुषमा कुमार , गायत्री परिवार के दिलीप पाणिग्राही , मुतवल्ली जामा मस्जिद के अब्दुल फहिम और कालीबाड़ी बंगाली समाज के रंजन बनर्जी ने अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान पहलगाम आंतकी हमले और युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले नागरिको की आत्मा की शांति के लिये दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना , संयुक्त सचिव सुश्री निधि साहू , कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं राजभवन के सभी अधिकारी-कर्मचारी सहित विभिन्न धर्मो , सम्प्रदायों के प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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