अघोरा चतुर्दशी पूर्वजों का स्मरण और प्रकृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
अघोरा चतुर्दशी का ज्योतिष अनुसार अत्याधिक महत्व है।
हिंदू केलेण्डर के अनुसार 21 अगस्त 2025 के दिन यह पर्व मनाया जाएगा
चतुर्दशी तिथि का समय ज्योतिष शास्त्र और हिंदू पंचांग में भी विशेष स्थान रखता है। यह तिथि विशेषकर कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी में अधिक प्रभावी मानी जाती है। इस समय को कुछ विशेष कारणों की पूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। कुछ खास सिद्धियों की प्राप्ति, कुछ विशेष कार्यों की सफलता, वाद-विवाद विजय, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, बंधन मुक्ति इत्यादि से संबंधित माना गया है। कार्तिक मास की अघोरा चतुर्दशी का दिन विशेष पुण्यदायक और कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन तीर्थ स्नान, व्रत, जप, दान और तप से प्राप्त पुण्य से व्यक्ति अपने पापों और ऋण से मुक्त हो सकता है। यह दिन संयम, साधना और स्वयं की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि यदि अमावस्या तिथि, विशेष नक्षत्र, दुर्लभ योग और उपयुक्त करण का संयोग हो तथा वह शनिवार, सोमवार या गुरुवार जैसे शुभ वार में पड़े तो यह दिन और भी फलदायक हो जाता है। अघोरा चतुर्दशी को विशेषकर उन लोगों के लिए उत्तम माना गया है जो जीवन में कठिनाइयों, मानसिक क्लेश और पितृदोष का अनुभव कर रहे हैं। इस दिन श्रद्धा भाव से किया गया कोई भी धार्मिक कार्य अक्षय फल देने वाला होता है। भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और ध्यान इस दिन विशेष फलदायी माने गए हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार यह व्रत यदि एक वर्ष तक लगातार किया जाए तो तन, मन और धन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है।
ज्योतिष अनुसार भी इस दिन को बहुत विशेष माना गया है। स्वास्थ्य ज्योतिष के अनुसार इस दिन किए गए कार्यों के प्रभाव से शरीर के रोग और बीमारी दूर होती हैं, मानसिक शांति प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। इस दिन किया गया श्राद्ध कर्म पितरों की आत्मा को तृप्त करता है, जिससे वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, यह तिथि भूत-प्रेत बाधाओं को समाप्त करने में भी अत्यंत सहायक मानी जाती है। घर की शुद्धि, वातावरण की नकारात्मकता को समाप्त करने हेतु विशेष उपाय किए जाते हैं जिससे रोग, क्लेश और संकटों से छुटकारा मिले।


















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