बाल साहित्य के कुशल चितेरे -विनय शरण सिंह
आलेख -कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
खैरागढ़ । सभी प्रकार के ताम-झाम से दूर एक सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले बाल साहित्यकार का ही नाम विनय शरण सिंह है। खैरागढ़ राज फैमिली से होने के बावजूद कभी भी उन्होंने इसे अपने जीवन के ऊपर हावी नहीं होने दिया।
बाल साहित्य के क्षेत्र में विनय शरण सिंह छत्तीसगढ़ में एक जाना पहचाना नाम है।स्कूली पाठ्यक्रमों में बच्चें उनकी कविताएं,कहानियां पढ़ते रहते हैं।बाल साहित्य में उनकी रचनाएं बच्चों के लिए मनोविज्ञान से भरपूर होती है। हिन्दी और छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार है।पाठ्य पुस्तक निगम रायपुर द्वारा वे अनेक कहानियों के हिन्दी छत्तीसगढ़ी अनुवाद करते रहें है।पापुनिरा द्वारा प्रकाशित महापुरुषों की जीवनियों पर आधारित चित्र कथाओं में ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह और यती यतनलाल प्रमुख है।
राज्यपाल और राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित विनय शरण सिंह आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उन्हें उनके उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए 2014 में राज्यपाल और 2016 में राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया है।उनकी चर्चित बाल साहित्य में 1-नानी का गाँव(हिन्दी बाल कहानी)2-जंगल के पहरेदार (हिन्दी बाल नाटक)3-पींयर-पींयर फूल (छग.बाल कविताएं)4-जंगल के रखवार (छग.बाल कहानियां) प्रमुख है।उनकी रचनाओं को पढ़ने से ऐसे लगता है मानो वो बोलती है।
आँखो के सामने एक चित्र उभरकर सामने आ जाता है।भाव पक्ष के साथ कला पक्ष भी मजबूत हो तो रचनाओं की गरिमा अपने आप बढ़ जाती है।और यही दर्शन उनके साहित्य में हमें देखने को मिलता है।सरल सहज भाषा में बच्चों के लिए जो बाल मनौवैज्ञानिक रचनाएं वे गढ़ते हैं ये उनकी कलम की ताकत है।
वे बाल साहित्य के ऐसे कुशल चितेरे हैं जिन्होने छत्तीसगढ़ी बाल साहित्य में बाल विधा की कमी को शुरुवाती दौर से ही पूरा किया है। छत्तीसगढ़ी बाल साहित्य में उनका योगदान चिरकाल तक अक्षुंड रहेगा। रिटायरमेंट के बाद आज भी उनकी लेखनी सतत जारी है और हम जैसे छोटे कलमकारों के प्रेरणास्रोत है।उनकी लेखनी को सादर नमन है।उसकी एक सुंदर कविता के साथ आलेख को विराम देता हूँ।
मेरी माँ बड़ी है भोली।
मिसरी जैसे उसकी बोली।
खूब सबेरे उठ जाती है।
और काम में जुट जाती है।
आलेख -कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
कटंगी-गंडई जिला केसीजी
छत्तीसगढ़ -9977533375



















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