नवरात्र विशेष
अष्टम् स्वरूप महागौरी- माता रानी की सच्चे मन से पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
नवरात्रि अष्टमी तिथि मंगलवार आज देवी महागौरी का विशेष पूजन मंदिरों और घरों में किया जाता है। देवी महागौरी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने गंगाजल से स्नान कराकर उनका रंग गौर कर दिया, जिससे वे महागौरी कहलाईं। इस दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है, जो भक्तों को समस्त सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं और उनके सभी कष्टों को दूर करती हैं।
कठोर तपस्या:
देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की, जिसके कारण उनका शरीर धूल और मिट्टी से ढँक गया और उनका रंग काला पड़ गया।
शिवजी का वरदान:
देवी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया। शिवजी ने गंगा के पवित्र जल से उनका स्नान कराया, जिससे देवी का वर्ण श्वेत और कांतिमान हो गया और वे महागौरी कहलाईं।
महागौरी का स्वरूप:
इस रूप में देवी महागौरी अत्यंत शांत, स्नेहमयी और करुणामयी दिखती हैं।
नवरात्रि का यह आठवां दिन (अष्टमी) देवी महागौरी को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
अशुभ राक्षसों का वध:
एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन देवी पार्वती ने कौशिकी रूप धारण करके शुंभ-निशुंभ नामक असुरों का वध किया था।
अष्टमी और कन्या पूजन:
अष्टमी तिथि पर देवी दुर्गा और महागौरी की पूजा के बाद कन्याओं को भोजन कराकर और दक्षिणा देकर प्रसन्न किया जाता है।


















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