रिपोर्टर रोहित वर्मा
लोकेशन खरोरा
पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, मांगा चंद्र देवता से आशीर्वाद
खरोरा--
अपने पति की आयु स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करते हुए शुक्रवार को सुहागिनों ने करवाचौथ का व्रत रखा। चेतन प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि भारतीय परंपरा के 4 आश्रमों में गृहस्थ आश्रम का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है पति व्रत को महिलाओं का परम धर्म माना जाता रहा है।
सूर्योदय से लेकर चांद के दीदार होने तक अपने पति की दीर्घायु के लिये उन्हे मन में संजोए कठोर निर्जला व्रत का पालन किये फिर चन्द्रदेव के दर्शन कर अखंड वितरण सौभाग्य का वरदान मांगा। कार्तिकमास कृष्ण पक्ष चतुर्थी करवाचौथ को विवाहित महिलाएं दिन भर अन्न, जल का त्याग कर आस्था के सहारे यह कठिन व्रत रखा। इस अवसर पर कलश में रखे जल की करवा माता के रूप में पूजा की तत्पश्चात् देर रात चांद देखने के बाद छलनी में अपने पति की झलक देखकर उनके हाथों से पानी पीकर पति व्रती महिलाओं ने अपना व्रत
तोड़ा। इससे पूर्व महिलाओं ने सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव, पार्वती, गणेश कार्तिकेय की पूजा की। सूर्योदय से आरंभ होकर चंद्रोदय तक चलने वाले इस व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन किया। शाम के समय घर की सभी व्रती महिलाएं पूजा थाली के साथ एकत्रित होकर करवा चौथ व्रत की कथा सुनने के पश्चात विधान के अनुसार छलनी से चांद को देखने के पश्चात पति के चेहरे को देखकर अर्घ्य
दिया। पतियों द्वारा अपने व्रती पत्नियों यह को पानी पिलाकर अन्न का पहला ग्रास खिलाने के बाद उनका व्रत तोड़ा। दिनभर का निर्जला व्रत चन्द्रदर्शन के साथ पूर्ण हुआ। व्रती महिलाएं पहले चन्द्रदेव की पूजन किये उसके बाद चलनी में दीप रखकर उन्हे देखे। इसके बाद अपने पति का दर्शन किये। चन्द्रदर्शन और आर्थ के साथ ही वत भी पूर्ण हुआ।



















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